नवाबगंज (गोण्डा) 8 फरवरी। क्षेत्र के मनकापुर रोड स्थित सिरसा कॉलोनी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार की सायं पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर नजर आया। कथा व्यास अवधेन्द्र प्रपन्नाचार्य ने भगवान कपिल और माता देवहूति के पावन संवाद का विस्तार से वर्णन करते हुए भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के महत्व को सरल शब्दों में समझाया।
कथा व्यास ने बताया कि भगवान विष्णु के अवतार भगवान कपिल ने अपनी माता देवहूति को सांख्य योग के माध्यम से आत्मज्ञान का उपदेश दिया। उनके करुणामय और ज्ञानपूर्ण प्रवचनों से माता देवहूति को परम तत्व की अनुभूति हुई और अंतत: उनका शरीर सिद्धिदा नामक पुण्य सलिला नदी में परिवर्तित हो गया। यह प्रसंग त्याग, साधना और ईश्वर भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अहंकार, मोह और आसक्ति का त्याग कर भक्ति और ज्ञान के मार्ग पर चलता है, तो वह जीवन के परम लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। भगवान कपिल का यह उपदेश आज के भौतिक युग में भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह आत्मशुद्धि और सदाचार का मार्ग प्रशस्त करता है।
कथा के दौरान प्रवचनों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और बार-बार जयकारों से पंडाल गूंजता रहा।इस अवसर पर यजमान पुनीत श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी अंशिका श्रीवास्तव के साथ विधिवत व्यास पीठ का पूजन, आरती एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया,उपस्थित प्रमुख लोग आचार्य ऋषभदेव, शैलेश शास्त्री, डॉ. गौरव सिंह, पंडित श्याम त्रिपाठी, पीयूष श्रीवास्तव, कप्तान पाठक, सभासद राजेन्द्र यादव, अभिषेक श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्त आदि सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

