नई दिल्ली ,09 फरवरी । देश की टैक्स प्रणाली में बड़े सुधार की दिशा में आयकर विभाग ने अहम कदम बढ़ा दिया है। विभाग ने ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026Ó का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है, जो संसद से मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 1962 से लागू मौजूदा आयकर नियमों की जगह लेगा। इसके साथ ही नया ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2025Ó आगामी 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने जा रहा है। इन्हीं नए प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नियमों और टैक्स फॉर्म्स का नया ढांचा तैयार किया गया है।
आयकर विभाग ने पारदर्शिता अपनाते हुए इस ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में रखा है, ताकि आम नागरिकों, टैक्सपेयर्स और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त किए जा सकें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इच्छुक व्यक्ति 22 फरवरी, 2026 तक अपनी राय और सुझाव दे सकते हैं।
टैक्स फॉर्म होंगे सरल और ‘स्मार्टÓ
नए ड्राफ्ट में टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। नियमों की भाषा को सरल किया गया है और कैलकुलेशन को समझने के लिए फॉर्मूले व टेबल्स का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही पुराने नियमों में मौजूद बेकार और दोहराव वाले प्रावधानों को हटाया गया है।
नए टैक्स फॉर्म्स को ‘स्मार्टÓ बनाया गया है, जिनमें प्री-फिल्ड डाटा और ऑटोमेटेड रिकंसिलिएशन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे न केवल टैक्स भरने की प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी काफी कम हो जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
नियम 57: संपत्तियों की फेयर मार्केट वैल्यू तय करने का नया फार्मूला
ड्राफ्ट का एक महत्वपूर्ण प्रावधान नियम 57 है, जिसके तहत विभिन्न संपत्तियों की फेयर मार्केट वैल्यू (स्नरूङ्क) तय की जाएगी। नांगिया ग्लोबल के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला के अनुसार, पुराने नियम 11्र, 11्र्र और 11्रक्च को मिलाकर अब एक ही नियम में समाहित कर दिया गया है।
ज्वैलरी: खुले बाजार में मिलने वाली कीमत को ही वैल्यू माना जाएगा। रजिस्टर्ड डीलर से खरीदी गई ज्वैलरी के लिए इनवॉइस मान्य होगा। उपहार या अन्य माध्यम से प्राप्त ज्वैलरी की वैल्यू 50 हजार रुपये से अधिक होने पर रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट अनिवार्य होगी।
पेंटिंग व कलाकृतियां: आर्टवर्क, स्कल्पचर और आर्कियोलॉजिकल कलेक्शन पर भी यही नियम लागू होगा।
जमीन व भवन: अचल संपत्ति के लिए संबंधित तिथि पर केंद्र या राज्य सरकार द्वारा तय स्टांप ड्यूटी वैल्यू को ही फेयर मार्केट वैल्यू माना जाएगा।
अन्य संपत्तियां: खुले बाजार में मिलने वाली संभावित कीमत के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।
नियम 6: होल्डिंग पीरियड की स्पष्ट व्यवस्था
– कैपिटल गेन टैक्स के लिए होल्डिंग पीरियड की गणना को लेकर भी नए नियमों में स्पष्टता लाई गई है।
शेयर, बॉन्ड और डिबेंचर: यदि बॉन्ड या डिबेंचर बाद में शेयरों में परिवर्तित होते हैं, तो बॉन्ड/डिबेंचर के रूप में रखी गई अवधि भी होल्डिंग पीरियड में शामिल होगी।
इनकम डिक्लेरेशन स्कीम, 2016 की संपत्तियां: रजिस्टर्ड डीड वाली अचल संपत्ति के लिए खरीद की तारीख से अवधि गिनी जाएगी, जबकि अन्य मामलों में होल्डिंग पीरियड 1 जून, 2016 से माना जाएगा।
विदेशी कंपनी की ब्रांच से प्राप्त संपत्ति: कन्वर्जन की स्थिति में पहले मालिक या विदेशी ब्रांच के पास रही अवधि को भी जोड़ा जाएगा।
आयकर विभाग का कहना है कि इन बदलावों से टैक्स व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगी, जिससे टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी।
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