नई दिल्ली/कोलकाता 9 फरवरी (आरएनएस)। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ कर दिया है कि एसआईआर की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल की एसआईआर से जुड़े कई मामलों पर सुनवाई कर रहा है। इनमें ममता बनर्जी की एक याचिका भी शामिल थी। इसमें उन्होंने अन्य मुद्दों के साथ-साथ ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीÓ सूची में मतदाताओं को जिस तरह से कैटेगरी में बांटा गया है, उसे चुनौती दी गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ कर दिया है कि एसआईआर की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसमें कोई बाधा भी पैदा करने की परमिशन अदालत नहीं देगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी राज्यों को इस बात को समझ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जो कुछ भी स्पष्टता चाहिए, वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाएगी। आज की सुनवाई में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी भी वकील बनकर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ऐसा भी हुआ है कि अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा क्षेत्रों में यदि 1000 वोटर थे तो उनमें से 950 को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीÓ सूची में डाल दिया गया है। इस दौरान वोटर लिस्ट में किसी नाम को जोडऩे पर आपत्ति जताने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म 7 पर भी बहस हुई। कल्याण बनर्जी ने कहा कि ऐसी बहुत सी आपत्तियां दायर हुई हैं, लेकिन यह तक नहीं पता कि इन्हें किन लोगों ने दायर किया है। सुनवाई के दौरान ऐसे लोगों को भी मौजूद रहना चाहिए, जिससे पता चले कि आखिर आपत्ति जताने वाले कौन हैं। एक व्यक्ति 1000 से ज्यादा आपत्तियां दायर कर दे रहा है। ऐसी सभी शिकायतें अज्ञात व्यक्ति के नाम से दायर होती हैं। बता दें कि इस मामले में एक और अर्जी भी दाखिल हुई थी, जिसमें ममता बनर्जी के अदालत में वकील के तौर पर पेश होने पर आपत्ति जताई गई थी। इस पर बेंच ने कहा कि इसमें ऐसा क्या है, जिसकी सुनवाई की जानी चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि कोई सीएम वकील के तौर पर पेश होता है तो यह हमारे संविधान की ताकत को दिखाता है। इसमें आपत्ति जैसी कोई बात नहीं है। इस मसले पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। बता दें कि एसआईआर को लेकर ममता बनर्जी ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि असम में यह नहीं हो रहा है, जहां भाजपा की सरकार है। लेकिन विपक्षी दलों की सत्ता वाले राज्यों में ही भाजपा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। इस केस में ममता बनर्जी वकील के रूप में पहुंची थीं। यह भारत की अदालतों के इतिहास में पहला मौका था, जब कोई मौजूदा मुख्यमंत्री वकील के तौर पर कोर्ट में दलीलें देने के लिए पहुंचा।
बहगहाल जो भी हो बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की दलील थी कि, जिस तरह से वोटर रिविजन एक्सरसाइज की जा रही है, उससे समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के लाखों वोटरों के नाम हटा दिए जाएंगे। उन्होंने चुनाव निकाय को एसआईआर एक्सरसाइज के दौरान किसी भी वोटर का नाम हटाने से रोकने के लिए अंतरिम निर्देश मांगे हैं, खासकर उन लोगों के नाम जो ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीÓ कैटेगरी में रखे गए हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीएम ममता की याचिका पर ईसीआई को नोटिस जारी किया था। ऐसे में सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि स्थानीय बोलियों के कारण स्पेलिंग में अंतर पूरे भारत में होता है और यह असली वोटरों को बाहर करने का आधार नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट को संबोधित करते हुए सीएम बनर्जी ने दावा किया कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं और घर बदलने वाले लोगों पर इसका असमान रूप से असर पड़ रहा है।
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