लंदन ,10 फरवरी। ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। एपस्टीन फाइल्स विवाद ने दुनिया भर की सरकारों को हिलाकर रख दिया है और इसकी आंच अब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी तक पहुंच गई है। चर्चा जोरों पर है कि स्टार्मर की सरकार गिर सकती है। इस राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक नाम तेजी से उभरकर सामने आया है, और वह है शबाना महमूद। अगर स्टार्मर को पद छोडऩा पड़ता है, तो ब्रिटेन को इतिहास में पहली बार एक मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री मिल सकती है। शबाना महमूद इस वक्त ब्रिटिश सरकार में गृह मंत्री (॥शद्वद्ग रूद्बठ्ठद्बह्यह्लद्गह्म्) हैं और उन्हें लेबर पार्टी में पीएम पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
पीओके के मीरपुर से जुड़ा है परिवार का नाता
शबाना महमूद वर्तमान में लेबर पार्टी की सबसे कद्दावर नेताओं में से एक हैं और उन्हें कीर स्टार्मर का बेहद करीबी माना जाता है। 45 वर्षीय शबाना पेशे से वकील हैं और एक कुशल वक्ता के तौर पर अपनी पहचान रखती हैं। उनका जन्म ब्रिटेन के बर्मिंगम में हुआ था, लेकिन उनके परिवार का ताल्लुक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (क्कश्य) के मीरपुर कस्बे से है। उनके पिता महमूद अहमद और मां जुबैदा वहीं के रहने वाले थे। ऑक्सफोर्ड के लिंकन कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल करने वाली शबाना को 2010 में पहली बार सांसद बनने का मौका मिला था। वह रौशन आरा अली और यासमीन कुरैशी के साथ उन चुनिंदा मुस्लिम महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने ब्रिटिश संसद में अपनी जगह बनाई है। वर्ष 2025 में गृह मंत्री का पद संभालने के बाद से उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ब्रिटेन की सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की रही है।
फिलिस्तीन समर्थक होने से पार्टी को हुआ फायदा
शबाना महमूद की राजनीतिक शैली काफी दिलचस्प है। उन्होंने लेबर पार्टी से उस वर्ग को दोबारा जोडऩे का काम किया है, जो पिछले कुछ सालों में पार्टी से नाराज होकर दूर हो गया था। इसकी मुख्य वजह यह थी कि लेबर पार्टी ने गाजा संघर्ष में इजरायल का पक्ष लिया था, जबकि शबाना महमूद ने खुलकर इजरायली हमलों का विरोध किया और फिलिस्तीन का समर्थन किया। उनकी इस बेबाक राय के चलते एक बड़े तबके ने फिर से लेबर पार्टी पर भरोसा जताया है। हालांकि, जहां एक तरफ वह फिलिस्तीन की समर्थक हैं, वहीं दूसरी तरफ वह ब्रिटिश नागरिकता को लेकर सख्त कानून बनाने की भी उतनी ही बड़ी पैरोकार हैं। यह संतुलन उन्हें पार्टी के भीतर एक लोकप्रिय और स्वीकार्य चेहरा बनाता है।
पीटर मैंडलसन की नियुक्ति बनी सरकार के गले की फांस
कीर स्टार्मर की सरकार के संकट में घिरने की एक बड़ी वजह हाल ही में हुई एक राजनयिक नियुक्ति है। सरकार ने बीते दिनों पीटर मैंडलसन को वॉशिंगटन में यूके का राजदूत नियुक्त किया था। लेकिन मेंडलसन का नाम कुख्यात एपस्टीन से जुडऩे के कारण विवाद गहरा गया है और इसे लेकर सरकार की चौतरफा आलोचना हो रही है। एपस्टीन फाइल्स मामले में खुद कीर स्टार्मर को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी कुर्सी खतरे में है। ऐसे में अगर नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बनती है, तो शबाना महमूद को स्टार्मर के स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।
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