गुड़गांव 11 Feb, (Rns): साइबर सिटी गुड़गांव में ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त कैग (CAG) अधिकारी और उनकी पत्नी को निशाना बनाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसाने का डर दिखाया। शातिर ठगों ने बुजुर्ग दंपति को 18 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर उनकी जिंदगी भर की कमाई यानी कुल 2.13 करोड़ रुपये ठग लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
CBI और मुंबई क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर डराया
सेक्टर-64सी के रहने वाले पीड़ित इंद्र कुमार ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि इस खौफनाक सिलसिले की शुरुआत 13 जनवरी को हुई। उनके पास व्हाट्सएप पर एक कॉल आई, जिसमें कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई, ईडी और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। ठगों ने उनसे कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले से जुड़ा है और नरेश गोयल नामक व्यक्ति के केस में 20 लाख रुपये की संदिग्ध लेनदेन की बात कही गई। यहीं से डराने-धमकाने का खेल शुरू हुआ।
वीडियो कॉल के जरिए 24 घंटे रखी नजर, घर से निकलने पर थी पाबंदी
ठगों का जाल इतना गहरा था कि उन्होंने पीड़ित दंपति को घर के अंदर ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। आरोपियों ने स्काइप और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उन पर लगातार निगरानी रखी। उन्हें डराने के लिए फर्जी लेटरहेड पर ईडी, सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट के दस्तावेज दिखाए गए, जिनमें गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति जब्त करने के आदेश का जिक्र था। ठगों ने उन्हें किसी से भी बात करने या घर से बाहर निकलने तक से मना कर दिया था, जिससे दंपति बुरी तरह दहशत में आ गया।
डर के मारे खाली कर दिए बैंक खाते
लगातार 18 दिनों तक चले इस मानसिक दबाव और गिरफ्तारी के डर के कारण पीड़ित टूट गए। घबराहट में उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। इंद्र कुमार ने कुल 2 करोड़ 13 लाख 16 हजार रुपये ठगों के बताए खातों में भेज दिए। जब काफी दिन बीत जाने के बाद भी दबाव कम नहीं हुआ, तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने 9 फरवरी को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शुरू की खातों की जांच
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर उन बैंक खातों की पड़ताल शुरू कर दी है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने आम जनता के लिए एडवाइजरी भी जारी की है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या पैसों की मांग नहीं करती। ऐसे किसी भी कॉल या मैसेज पर भरोसा करने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना दें।


















