ढाका ,11 फरवरी । भारत में आयोजित टी20 वर्ल्ड कप में ‘सुरक्षा कारणोंÓ का हवाला देकर खेलने से इनकार करने वाले बांग्लादेश ने अब एक नया और चौंकाने वाला दावा किया है। आईसीसी की तमाम कोशिशों और मनाने के बावजूद जब बांग्लादेश ने टीम भेजने से मना कर दिया था, तो उनकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया था। उस समय यह माना जा रहा था कि यह फैसला पूरी तरह से बांग्लादेश सरकार का था, लेकिन अब बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए अपने ही पुराने बयान से यू-टर्न ले लिया है।
‘खिलाडिय़ों और बोर्ड ने दी कुर्बानीÓ
आसिफ नजरुल ने मंगलवार को रिपोर्टर्स से बातचीत करते हुए कहा कि वर्ल्ड कप का बॉयकॉट करने का फैसला सरकार का नहीं, बल्कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (क्चष्टक्च) और उनके खिलाडिय़ों का निजी फैसला था। उन्होंने दावा किया कि खिलाडिय़ों ने देश के क्रिकेट की सुरक्षा, लोगों की सुरक्षा और ‘राष्ट्रीय सम्मान की रक्षाÓ के लिए अपने वर्ल्ड कप खेलने के सपने का ‘बलिदानÓ दिया है। नजरुल ने जोर देकर कहा कि वर्ल्ड कप में न खेलने का उन्हें कोई मलाल या अफसोस नहीं है।
जनवरी में कहा था- यह पूरी तरह सरकार का फैसला
खेल सलाहकार का यह नया बयान उनके जनवरी में दिए गए बयानों से बिल्कुल उलट है, जिससे विरोधाभास की स्थिति पैदा हो गई है। जनवरी में खिलाडिय़ों के साथ एक बैठक के बाद नजरुल ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने या न लेने का फैसला “पूरी तरह से” सरकार का है। उस समय उन्होंने मीडिया से कहा था कि मीटिंग का मकसद सिर्फ खिलाडिय़ों को यह समझाना था कि सरकार ने यह फैसला क्यों लिया है। तब उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें आईसीसी से इंसाफ नहीं मिला, इसलिए सरकार ने कदम उठाया।
आईसीसी से मिली राहत, बैन नहीं लगेगा
अपने ताजा बयान में आसिफ नजरुल ने यह भी बताया कि आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि टूर्नामेंट न खेलने के कारण बांग्लादेश पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। साथ ही भविष्य में बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए भी दावेदार माना जाएगा। उन्होंने इसे एक बड़ी कामयाबी बताते हुए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के फैसले को सलाम किया है।
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