-अवध विवि के श्रीराम शोध पीठ के सेमिनार सभागार में श्रद्धांजलि सभा व गोष्ठी का हुआ आयोजन
अयोध्या 11 फरवरी (आरएनएस)। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय श्रीराम शोध पीठ के सेमिनार सभागार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा एवं विचार संगोष्ठी का आयोजन दीनदयाल शोध पीठ द्वारा कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में किया गया। विचार संगोष्ठी के मुख्य वक्ता पूर्व प्रांत प्रचारक कर्नाटक उत्तर क्षेत्र के गोपाल जी रहे। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि दीनदयाल जी का मानना था कि किसी भी देश की प्रगति का पैमाना ऊँची इमारतों या जीडीपी से नहीं, बल्कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की स्थिति से मापा जाना चाहिए। उनका लक्ष्य था कि समाज के अंतिम व्यक्ति का उदय और कल्याण। आज के परिपेक्ष में भारत की कई प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं इसी दर्शन पर आधारित हैं। कुलपति ने कहा कि एकात्म मानववाद पर पंडित दीनदयाल वैचारिक बिंदु के तहत मनुष्य केवल एक Óआर्थिक प्राणीÓ नहीं है। समाज का विकास तभी संभव है, जब मनुष्य के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का विकास एक साथ हो।
मुख्य अतिथि गोपाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल का संपूर्ण जीवन राष्ट्रीय विचारधारा से प्रेरित था। उनके हृदय में सदैव राष्ट्र चिंतन रहा। छात्र जीवन से ही है सामाजिक उत्थान के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे। उनकी दृष्टि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ाने की रही। काफी विरोध के बावजूद भी पंडित जी का जीवन समाज में सामंजस्य स्थापित करने का रहा । पंडित दीनदयाल उपाध्याय पत्रकारिता के माध्यम से संपूर्ण समाज को संजोने का कार्य किया है। वे समाज के निर्माण में रुचि लेने वाले महान व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। पंडित दीनदयाल का चिंतन था कि एक परिवार के साथ एक ग्रामीण क्षेत्र फिर समाज फिर देश का विकास होना चाहिए। मुख्य अतिथि ने कहा कि शिक्षा, चिकित्सा व्यापार की वस्तु नहीं है। यह भेद भावपूर्ण कार्य है। भारत की की प्राचीन संस्कृति में कई शिक्षा और चिकित्सा को व्यापार का माध्यम नहीं बनाया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. शैलेंद्र कुमार ने किया और धन्यवाद ज्ञापन अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. मृदुला मिश्रा ने किया। इस अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि सभा में प्रो. आशुतोष सिन्हा, प्रो जसवंत सिंह, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो फर्रुख जमाल, प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव, डॉ.अवध नारायण, डॉ. दिवाकर त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे ।
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