नई दिल्ली ,12 फरवरी । अगर आप भी बैंक में लोन लेने जाते हैं और बैंक अधिकारी लोन की फाइल के साथ आपको जबरदस्ती बीमा पॉलिसी या क्रेडिट कार्ड थमा देते हैं, तो यह खबर आपको बड़ी राहत देने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (क्रक्चढ्ढ) ने बैंकों द्वारा की जा रही ‘मिस-सेलिंगÓ और डिजिटल धोखाधड़ी यानी ‘डार्क पैटर्नÓ पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय बैंक ने इसके लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो आगामी 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। इन नियमों का सीधा असर यह होगा कि अब कोई भी बैंक आपकी स्पष्ट और अलग से दी गई सहमति के बिना आपको कोई भी एक्स्ट्रा प्रोडक्ट नहीं बेच पाएगा।
एक क्लिक में सहमति का खेल खत्म
अब तक डिजिटल बैंकिंग में अक्सर देखा जाता था कि ग्राहक जब लोन या किसी सेवा के लिए ऑनलाइन आवेदन करता है, तो वहां पहले से टिक किए गए बॉक्स या ‘आई एग्रीÓ (ढ्ढ ्रद्दह्म्द्गद्ग) का एक ही बटन होता है। इस एक बटन को दबाते ही ग्राहक अनजाने में लोन के साथ-साथ बीमा और अन्य सेवाओं के लिए भी अपनी मंजूरी दे देता था। आरबीआई ने साफ कर दिया है कि अब यह तरीका नहीं चलेगा। नए नियमों के मुताबिक, बैंकों को हर एक प्रोडक्ट के लिए ग्राहक से अलग-अलग और स्पष्ट सहमति लेनी होगी। यानी लोन के लिए अलग हस्ताक्षर और बीमा के लिए अलग मंजूरी अनिवार्य होगी, जिससे छुपे हुए एग्रीमेंट का डर खत्म हो जाएगा।
ग्राहक की हैसियत देखकर ही बेच सकेंगे प्रोडक्ट
नए दिशा-निर्देशों में बैंकों की जवाबदेही तय की गई है कि वे ग्राहक की प्रोफाइल और जरूरत के हिसाब से ही प्रोडक्ट बेचें। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ग्राहक की आय सीमित है और बैंक उसे कोई जटिल और जोखिम भरा निवेश प्लान बेच देता है, तो इसे अब ‘मिस-सेलिंगÓ माना जाएगा। बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह जो प्रोडक्ट ऑफर कर रहा है, वह ग्राहक की आर्थिक स्थिति से मेल खाता है या नहीं। साथ ही, यह भी स्पष्ट बताना होगा कि बेचा जा रहा प्रोडक्ट खुद बैंक का है या किसी थर्ड पार्टी कंपनी का है।
डार्क पैटर्न और एजेंटों पर भी सख्ती
आरबीआई ने डिजिटल ऐप्स और वेबसाइटों पर इस्तेमाल होने वाले ‘डार्क पैटर्नÓ को भी प्रतिबंधित कर दिया है। अक्सर ग्राहकों को ‘आज आखिरी मौकाÓ या उल्टी गिनती वाली घड़ी दिखाकर दबाव में फैसला लेने पर मजबूर किया जाता है, जिसे अब गैर-कानूनी माना जाएगा। इसके अलावा, बैंकों में बैठे थर्ड पार्टी एजेंट अब खुद को बैंक कर्मचारी बताकर ग्राहकों को गुमराह नहीं कर सकेंगे। उन्हें अपनी पहचान साफ तौर पर बतानी होगी और बिक्री के लिए कॉल भी सिर्फ तय ऑफिस समय में ही करनी होगी।
नियम तोड़े तो भरना होगा हर्जाना
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि बैंक ने गलत तरीके से या अधूरी जानकारी देकर कोई प्रोडक्ट बेचा है, तो बैंक को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा। इतना ही नहीं, अगर उस गलत प्रोडक्ट की वजह से ग्राहक को कोई आर्थिक नुकसान हुआ है, तो बैंक को उसकी भरपाई भी करनी होगी। फिलहाल आरबीआई ने इन नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है, जिस पर 4 मार्च 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं और अंतिम रूप से 1 जुलाई 2026 से इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।
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