रायपुर, 13 फरवरी(आरएनएस) विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के भव्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सूचना क्रांति के इस दौर में भी आकाशवाणी किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए एक विश्वसनीय जीवनरेखा बना हुआ है। उन्होंने रेडियो की विश्वसनीयता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की गति के संगम को जनसेवा की दिशा में एक नई क्रांति करार दिया।
यह विशेष आयोजन आकाशवाणी और यूनेस्को द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसकी थीम ‘रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ रखी गई। कार्यक्रम में संचार के बदलते परिदृश्य में रेडियो की प्रासंगिकता और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि आकाशवाणी सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन का सशक्त माध्यम है, जिसने दशकों से जनविश्वास अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि तेज और त्वरित समाचारों की प्रतिस्पर्धा के बीच भी आकाशवाणी ने संतुलित, प्रमाणिक और जनहितकारी प्रसारण की परंपरा को अक्षुण्ण रखा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में एफएम ट्रांसमीटरों के विस्तार से जल्द ही राज्य की लगभग 95 प्रतिशत आबादी तक रेडियो की पहुंच सुनिश्चित हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि रेडियो की व्यापक पहुंच और प्रभावशीलता ही है कि देश के सर्वोच्च नेतृत्व ने संवाद के लिए इस माध्यम को चुना।

कार्यक्रम में आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव जैन ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि रेडियो समाज के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने बताया कि 23 भाषाओं और 182 बोलियों में प्रसारण के माध्यम से आकाशवाणी देश के दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ रहा है। बदलती तकनीक के अनुरूप एआई का उपयोग भी इस तरह किया जाएगा कि श्रोताओं के साथ आत्मीय रिश्ता और विश्वसनीयता बनी रहे।
समारोह में यूनेस्को की क्षेत्रीय संचार एवं सूचना सलाहकार हज्जाज माले ने भी रेडियो की वैश्विक भूमिका और इसकी विश्वसनीयता की सराहना की।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘स्वाधीनता का जयघोष’ शीर्षक से छह संगीत प्रस्तुतियों का डिजिटल विमोचन रहा। साथ ही रेडियो की विकास यात्रा पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई और विशेषज्ञों ने एआई के प्रभावी उपयोग पर मंथन किया।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस समारोह ने यह स्पष्ट किया कि बदलती तकनीक और डिजिटल युग के बावजूद रेडियो की प्रासंगिकता बरकरार है, और एआई के साथ इसका समन्वय संचार के भविष्य को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

