नई दिल्ली 21 फरवरी । बुढ़ापे में पैसों की चिंता अमूमन हर इंसान को सताती है। लोग अक्सर सोचते हैं कि नौकरी के बाद उनका खर्च कैसे चलेगा और इसके लिए वे शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों की ओर भागने लगते हैं। लेकिन अगर आप बिना कोई रिस्क उठाए एक सुरक्षित और तय आमदनी का मजबूत जरिया तलाश रहे हैं, तो सरकार की एक बेहद लोकप्रिय योजना आपकी सारी चिंताएं दूर कर सकती है। हम बात कर रहे हैं पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ की। इस स्कीम में अनुशासित तरीके से किया गया लंबी अवधि का निवेश आपको न सिर्फ करोड़पति बना सकता है, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आपकी मूल रकम को सुरक्षित रखते हुए हर महीने एक मोटी और टैक्स-फ्री आमदनी का भी पक्का इंतजाम कर सकता है।
पीपीएफ ही क्यों है सुरक्षित भविष्य के लिए पहली पसंद
पीपीएफ दशकों से भारत की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली लॉन्ग-टर्म सेविंग्स स्कीम बनी हुई है। इसे सीधे तौर पर सरकार का समर्थन प्राप्त है, जो इसे बाजार के सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में लाकर खड़ा कर देता है। आयकर अधिनियम की पुरानी व्यवस्था के तहत सेक्शन 80सी में निवेशकों को टैक्स छूट का लाभ मिलता है और सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम टैक्स-फ्री होती है। फिलहाल सरकार इस पर 7.1 फीसदी सालाना के हिसाब से ब्याज दे रही है, जिसकी हर तिमाही समीक्षा की जाती है। हालांकि 1990 और 2000 के दशक की तुलना में अब ब्याज दरें कम हुई हैं, लेकिन गिरती ब्याज दरों के इस दौर में भी अन्य फिक्स्ड-इनकम वाले विकल्पों की तुलना में इसका टैक्स-फ्री रिटर्न सुरक्षित भविष्य चाहने वाले निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक बना हुआ है।
खाते के संचालन और निवेश से जुड़े कुछ खास नियम
इस सरकारी योजना में निवेश के नियम बेहद सरल और स्पष्ट हैं। कोई भी नागरिक एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का निवेश कर सकता है। पीपीएफ खाते का लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है, लेकिन आप इसे अपनी सुविधानुसार आगे भी बढ़ा सकते हैं। 15 साल पूरे होने के बाद इसे पांच-पांच साल के ब्लॉक में हमेशा के लिए बढ़ाया जा सकता है। यह विस्तार नए निवेश के साथ या उसके बिना भी किया जा सकता है। अगर आप 15 साल बाद भी निवेश जारी रखना चाहते हैं, तो मैच्योरिटी के एक साल के भीतर आपको फॉर्म एच जमा करना अनिवार्य होता है। इस खाते में ब्याज की गणना हर महीने की 5 तारीख के बाद सबसे कम बैलेंस पर की जाती है, जो सालाना कंपाउंड होकर वित्तीय वर्ष के अंत में आपके खाते में जुड़ जाती है।
ऐसे तैयार होगा 1 करोड़ रुपये का मोटा फंड
करोड़पति बनने का गणित काफी सीधा है। अगर आप पीपीएफ खाते में हर साल अधिकतम सीमा यानी 1.5 लाख रुपये का निवेश करते हैं और ब्याज दर 7.1 फीसदी बनी रहती है, तो 15 साल बाद आपके पास 40.68 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। यदि आप इसे अगले पांच साल के लिए बढ़ाते हैं (यानी कुल 20 साल के लिए), तो यह रकम बढ़कर 66.58 लाख रुपये हो जाएगी। वहीं, दूसरे पांच साल के एक्सटेंशन के बाद यानी कुल 25 सालों के निरंतर निवेश के बाद आपका यह कॉर्पस बढ़कर 1.04 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को छू लेगा। इस तरह शुरुआती 15 साल की मैच्योरिटी के 10 साल बाद तक निवेश जारी रखकर आप एक करोड़ रुपये का लक्ष्य बड़ी ही आसानी से हासिल कर सकते हैं।
हर महीने 61,500 रुपये की आमदनी का यह है गणित
अब कल्पना कीजिए कि 25 साल बाद आपके पास 1.04 करोड़ रुपये का बड़ा फंड तैयार है। इसके बाद आप अपनी तरफ से पैसा जमा करना बंद कर देते हैं और सिर्फ इस पूरी रकम को पीपीएफ खाते में ही रहने देते हैं। 1.04 करोड़ रुपये पर 7.1 फीसदी की दर से आपको हर साल करीब 7.38 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के तौर पर मिलेंगे। अगर इस सालाना ब्याज को 12 महीनों में बांट दिया जाए, तो यह रकम लगभग 61,533 रुपये प्रति माह बैठती है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आपको मिलने वाली यह शानदार मासिक पेंशन केवल आपके ब्याज से आ रही होगी, जबकि आपका 1.04 करोड़ रुपये का मूलधन खाते में बिल्कुल सुरक्षित बना रहेगा।
रिटायरमेंट प्लानिंग और खाता खुलवाने की काम की बातें
सुरक्षित भविष्य के लिहाज से यह रणनीति इसलिए बेहद कारगर है क्योंकि इसमें आपकी पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहती है, नियमित आमदनी का जरिया बनता है और मैच्योरिटी राशि पर कोई टैक्स भी नहीं लगता है। लंबे समय तक जुड़े रहने से कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) का शानदार फायदा मिलता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार यह खाता किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुलवा सकते हैं, दोनों ही जगहों पर नियम और रिटर्न एक समान रहते हैं। ऑनलाइन सुविधाओं के लिए बैंक और फिजिकल ब्रांच के लिए पोस्ट ऑफिस का चुनाव किया जा सकता है। हालांकि, निवेश करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि 1.5 लाख रुपये की सालाना सीमा किसी भी हाल में पार नहीं की जा सकती। इसके अलावा 25 साल एक लंबी अवधि है, जिसमें ब्याज दरें बदल सकती हैं और महंगाई के असर के कारण भविष्य में 61,500 रुपये की वैल्यू आज जैसी नहीं रहेगी, इसलिए पूरी समझदारी और अनुशासन के साथ निवेश की शुरुआत करें।
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