New Delhi 21 Feb, (Rns) /- एनआईए की विशेष अदालत ने कहा— आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर, इस चरण में जमानत संभव नहीं*
प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के शिक्षा विंग के राष्ट्रीय प्रभारी अशरफ उर्फ करमन्ना अशरफ मौलवी को एनआईए की विशेष अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर और ठोस प्रतीत होते हैं।
एनआईए की विशेष अदालत के जज एम.के. मोहनदास ने शुक्रवार को आदेश सुनाते हुए स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अशरफ पर आरोप लगाया है कि वह संगठन के जरिए हथियार प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने, युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रेरित करने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की साजिश में शामिल थे। एजेंसी के अनुसार, वह इस मामले में दूसरे आरोपी हैं।
अशरफ का नाम पालक्काड में श्रीनिवासन की हत्या से जुड़े मामले में भी सामने आया है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह घटना एक व्यापक साजिश का हिस्सा थी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले ही पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद एनआईए और अन्य एजेंसियों ने देशभर में कई छापेमारी और गिरफ्तारियां की थीं।
अदालत के इस फैसले को एनआईए की जांच के लिए अहम माना जा रहा है। फिलहाल, मामले की आगे की सुनवाई तय तिथि पर होगी।

