गडग ,21 फरवरी (आरएनएस)। कर्नाटक की राजनीति में भ्रष्टाचार का एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी ठेकों में कमीशनखोरी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए एक मौजूदा विधायक को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। गडग जिले की शिरहट्टी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक चंद्रू लमानी को एक ठेकेदार से लाखों रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोचा गया है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी से पूरे सूबे के राजनीतिक और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
दीवार निर्माण के नाम पर मांगी गई थी 11 लाख की घूस
जानकारी के मुताबिक, भ्रष्टाचार का यह पूरा खेल सड़क किनारे बनने वाली एक रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) के निर्माण कार्य से जुड़ा हुआ है। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने के एवज में विधायक चंद्रू लमानी ने एक ठेकेदार से कुल 11 लाख रुपये की मोटी रिश्वत की मांग की थी। डील तय होने के बाद, जैसे ही विधायक इस रकम में से 5 लाख रुपये की पहली किस्त (एडवांस) ले रहे थे, पहले से ही जाल बिछाकर बैठी लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। टीम ने मौके से रिश्वत की रकम और कई अहम सुबूत भी अपने कब्जे में ले लिए हैं।
ठेकेदार की शिकायत पर बिछाया गया था जाल
इस पूरे ऑपरेशन को एक पुख्ता शिकायत के आधार पर अंजाम दिया गया। गडग जिले के ही चिंचली इलाके के रहने वाले और माइनर इरिगेशन विभाग के क्लास-1 ठेकेदार विजय पुजार ने लोकायुक्त से इसकी गुप्त शिकायत की थी। शिकायत में स्पष्ट आरोप लगाया गया था कि विधायक और उनके कुछ करीबी काम दिलाने के बदले खुलेआम कमीशन मांग रहे हैं। इसके बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7(ड्ड) और 7(्र) के तहत मामला (अपराध संख्या 02/2026) दर्ज कर इस ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।
पीए और निजी सहयोगी भी चढ़े पुलिस के हत्थे
घूसखोरी के इस खेल में विधायक अकेले नहीं थे, बल्कि उनका पूरा तंत्र इसमें शामिल था। लोकायुक्त पुलिस ने मुख्य आरोपी विधायक चंद्रू लमानी के साथ-साथ उनके दो बेहद खास सहयोगियों को भी मौके से हिरासत में लिया है। इनमें विधायक का निजी सहायक (पीए) मंजूनाथ वाल्मीकि और उनका एक अन्य करीबी सहयोगी गुरुनायक शामिल है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को सुरक्षित हिरासत में ले लिया है और उनसे सघन पूछताछ की जा रही है ताकि भ्रष्टाचार के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हुआ ऑपरेशन
इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील ट्रैप ऑपरेशन को गडग लोकायुक्त पुलिस स्टेशन की एक विशेष टीम ने बेहद गुप्त तरीके से अंजाम दिया। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस निरीक्षक परमेश कवटगी ने किया। वहीं, ऑपरेशन की पल-पल की निगरानी गडग के डीएसपी और धारवाड़ के एसपी के मार्गदर्शन में की गई। लोकायुक्त के आधिकारिक बयान के अनुसार, रिश्वत मांगने और स्वीकार करने से जुड़े सभी तथ्यों व साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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