रायपुर,21 फरवरी(आरएनएस)। भारत आज एक ऐतिहासिक शहरी परिवर्तन के मुहाने पर खड़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ?1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड (ष्टस्न) को स्वीकृति देना इस बात का संकेत है कि देश अब पारंपरिक अनुदान-आधारित वित्तपोषण मॉडल से आगे बढ़कर बाज़ार-संलग्न और सुधार-आधारित शहरी विकास की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।
छत्तीसगढ़ के लिए यह मात्र एक नई योजना नहीं है, बल्कि अपने शहरी केंद्रों को पुनर्परिभाषित करने का अवसर है—भिलाई और कोरबा के औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर रतनपुर और सिरपुर की सांस्कृतिक विरासत तक—ताकि वे रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करने वाले सशक्त आर्थिक इंजन बन सकें।
अवसरों का कॉरिडोर
ष्टस्न के सिटीज़ ऐज़ ग्रोथ हब्स घटक के अंतर्गत नवा रायपुर–भिलाई–दुर्ग कॉरिडोर को एक समेकित सिटी इकोनॉमिक रीजन के रूप में विकसित करने का सुनहरा अवसर है। एकीकृत भू-आर्थिक और परिवहन नियोजन के माध्यम से राज्य इस क्षेत्र के लिए अत्यावश्यक अवसंरचना—विशेषकर ट्रांजिट कॉरिडोर—के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकता है, जिससे इसकी आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
यह दृष्टिकोण इस तथ्य को स्वीकार करता है कि शहर अलग-थलग विकसित नहीं होते। ष्टस्न के तहत उपलब्ध निवेश का पैमाना हमें केवल वर्तमान आबादी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए भी योजनाबद्ध विकास का अवसर देता है।
शहरों के लिए जीवनरेखा
छत्तीसगढ़ के आंतरिक क्षेत्रों के लिए ?5,000 करोड़ की क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना अत्यंत परिवर्तनकारी सिद्ध हो सकती है। मुंगेली, धमतरी और कवर्धा जैसे छोटे शहरों को अब तक निजी पूंजी तक पहुँचने में कठिनाई होती रही है। अब केंद्र सरकार पहली बार प्रथम ऋण (?7 करोड़ तक) पर 70त्न गारंटी प्रदान कर रही है, जिससे ?20 करोड़ या उससे अधिक मूल्य की परियोजनाएँ बैंक योग्य बन सकेंगी।
यह राज्य सरकार के लिए एक अभूतपूर्व अवसर है कि वह छोटे शहरी निकायों की जल एवं स्वच्छता परियोजनाओं को समेकित कर वित्तीय रूप से सक्षम परिसंपत्तियों में परिवर्तित करे, ताकि छोटे नगर भी आर्थिक विकास के अगले चरण का हिस्सा बन सकें।
वहीं बिलासपुर और दुर्ग जैसे शहर अपशिष्ट से ऊर्जा (वेस्ट-टू-एनर्जी) परियोजनाओं के क्लस्टर हब बन सकते हैं, यह दर्शाते हुए कि पर्यावरणीय स्थिरता भी आर्थिक रूप से व्यवहार्य अवसंरचना बन सकती है।
स्वच्छता: गौरव और आगे की दिशा
अर्बन चैलेंज फंड स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी साफ-सफाई में निवेश को और गति देगा—वे क्षेत्र जहाँ छत्तीसगढ़ पहले ही उल्लेखनीय नेतृत्व प्रदर्शित कर चुका है।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024–25 पुरस्कारों में बिलासपुर को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हुआ, साथ ही कुम्हारी और बिल्हा को भी सम्मानित किया गया। रायपुर को राज्य स्तर पर मंत्री पुरस्कार मिला। अंबिकापुर को 50,000 से 3 लाख आबादी वर्ग में “सुपर स्वच्छ लीग सिटी” का दर्जा मिला, जबकि पाटन और विश्रामपुर को 20,000 से कम आबादी वर्ग में सम्मानित किया गया।
ये उपलब्धियाँ हमारे शहरी निकायों की प्रतिबद्धता, जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम हैं। ष्टस्न के माध्यम से उन्नत अपशिष्ट प्रसंस्करण, टिकाऊ स्वच्छता प्रणालियाँ और दीर्घकालिक संचालन एवं अनुरक्षण (ह्र&रू) ढाँचे स्थापित किए जा सकेंगे, जिससे स्वच्छता एक स्थायी शहरी संस्कृति बन सके।
औद्योगिक पुनरुद्धार और विरासत संवर्धन
छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विरासत हमारी शक्ति भी है और जिम्मेदारी भी। कोरबा और भिलाई जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर ब्राउनफील्ड क्षेत्र हैं, जिनमें अपार आर्थिक संभावनाएँ निहित हैं।
ष्टस्न के क्रिएटिव रीडेवलपमेंट ऑफ सिटीज़ घटक के अंतर्गत इन क्षेत्रों का पुनरुद्धार कर उन्हें आधुनिक व्यावसायिक जिलों, हरित पार्कों और नवाचार केंद्रों में बदला जा सकता है। इससे पर्यावरणीय क्षरण कम होगा और निष्क्रिय भूमि को राजस्व सृजन करने वाली परिसंपत्तियों में परिवर्तित किया जा सकेगा।
साथ ही सिरपुर और रतनपुर जैसे ऐतिहासिक नगरों में विरासत संरक्षण को आधुनिक सुविधाओं—स्मार्ट लाइटिंग, बेहतर स्वच्छता और पैदल मार्गों—के साथ जोड़कर पर्यटन-आधारित, समावेशी और सतत विकास मॉडल विकसित किया जा सकता है।
विकसित छत्तीसगढ़ के लिए संतुलित विकास
छत्तीसगढ़ का शहरी परिवर्तन विकासोन्मुखी होने के साथ-साथ क्षेत्रीय रूप से संतुलित भी होना चाहिए। बिलासपुर और बस्तर जैसे क्षेत्रों का विकास समग्र और समावेशी प्रगति का रणनीतिक रोडमैप बन सकता है।
बिलासपुर उत्तर छत्तीसगढ़ का प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और लॉजिस्टिक्स केंद्र बनकर उभर रहा है। शहरी परिवहन, जल आपूर्ति, स्वच्छता और आर्थिक अवसंरचना में लक्षित निवेश इसे क्षेत्रीय विकास इंजन के रूप में सशक्त कर सकता है।सिटीज 2.0 के तहत बिलासपुर सौलिड वेस्ट मैनेजमैंट की दिशा में एक मॉडल बन कर उभर सकता है ।
वहीं बस्तर क्षेत्र में शहरी विकास को स्थिरता और सांस्कृतिक संरक्षण के साथ जोड़ा जा सकता है। बुनियादी सेवाओं को सुदृढ़ करना, पर्यावरण-संवेदी अवसंरचना को बढ़ावा देना और पर्यटन-संबद्ध शहरी सुविधाओं का विकास आजीविका के नए अवसर खोल सकता है।
बस्तर में विकास को प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के विजऩ के अनुरूप जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण का माध्यम भी बनना चाहिए। आवास, स्वच्छता, पेयजल, आजीविका, स्थानीय बाज़ार, कौशल विकास और लघु वनोपज मूल्य श्रृंखलाओं में निवेश से टिकाऊ आर्थिक अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
विकास को सांस्कृतिक संवेदनशीलता और सामुदायिक सहभागिता के साथ जोड़कर हम सुनिश्चित कर सकते हैं कि जनजातीय समाज राज्य की विकास यात्रा में समान भागीदार बने। यही संतुलित विकास विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की आधारशिला बनेगा।
सुधार ही नई आधारशिला
इतनी बड़ी पूंजी तक पहुँच सख्त शर्तों के साथ आती है। ष्टस्न परिणाम-आधारित है और परियोजनाएँ पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से चयनित होंगी। छत्तीसगढ़ को अपने शहरी निकायों की वित्तीय साख मजबूत कर उन्हें बैंकेबल एसेट क्लास के रूप में स्थापित करना होगा।
सफलता के लिए आवश्यक है:
वित्तीय अनुशासन: कम से कम 50त्न परियोजना लागत बाजार से—नगर निगम बॉन्ड, पूल्ड बॉन्ड या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप—के माध्यम से जुटानी होगी। रायपुर और बिलासपुर को शीघ्र क्रेडिट रेटिंग और बॉन्ड निर्गम की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।
संचालन दक्षता: प्रत्येक परियोजना के साथ टिकाऊ ह्र&रू मॉडल अनिवार्य होगा।
जवाबदेही: सुधार माइलस्टोन और प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (्यक्कढ्ढह्य) की पूर्ति के आधार पर ही वित्तपोषण जारी रहेगा।
स्मार्ट सिटीज़ मिशन से मिली सीख स्पष्ट है—अगली पीढ़ी के शहरी निकायों को स्वायत्तता के साथ वित्तीय अनुशासन भी अपनाना होगा। केवल सतही सुधार पर्याप्त नहीं होंगे; राजस्व-सृजन और परिणाम-आधारित परियोजनाएँ ही सफल होंगी।
अर्बन चैलेंज फंड हमारे नगर नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट आह्वान है। यह दृष्टि, अनुशासन और समन्वय की मांग करता है। हमें सतही सुधारों से आगे बढ़कर रोजगार सृजन, राजस्व वृद्धि और स्वच्छता में परिवर्तनकारी परिणाम देने वाली परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
प्रश्न सरल है, परंतु गहन—क्या छत्तीसगढ़ के शहर अगले बजट चक्र पर निर्भर रहेंगे, या वे आत्मनिर्भर, उत्पादक और भविष्य-तैयार विकास केंद्र बनेंगे?
अवसर अभूतपूर्व है। चुनौती स्पष्ट है। यदि हम दृढ़ निश्चय के साथ सुधारों को अपनाएँ और दूरदर्शिता के साथ योजना बनाएं, तो छत्तीसगढ़ भारत के अगले शहरी पुनर्जागरण का नेतृत्व कर सकता है—अनुदानों को विकास में, दायित्वों को परिसंपत्तियों में और शहरों को समृद्धि के इंजन में परिवर्तित करते हुए।
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