-पूर्वांचल क्षेत्र में 269 पक्षी प्रजातियां संरक्षित; शोध में सामने आए तथ्य
मिल्कीपुर-अयोध्या 24 फरवरी (आरएनएस)। आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक शोध में खुलासा हुआ है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में पक्षियों की 269 प्रजातियां संरक्षित हैं। इस शोध के प्रथम चरण में बहराइच और महाराजगंज जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह शोध आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से किया जा रहा है। दो वर्ष तक चलने वाले इस परियोजना पर नौ लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। विश्वविद्यालय के वन संवद्र्धन एवं वानिकी विभाग की विज्ञानी डॉ. उलमन यश्मिता इसकी प्रधान अन्वेषक हैं। शोध का उद्देश्य संरक्षित और असंरक्षित आद्र्रभूमियों में पक्षी समुदायों, उनके आवासीय कारकों और पारिस्थितिकी स्वास्थ्य का व्यापक आकलन करना है। शोध के अनुसार, बहराइच और बलरामपुर सहित तराई क्षेत्र पक्षियों के लिए सबसे उपयुक्त वातावरण प्रदान करता है, जिसकी जैव विविधता उत्कृष्ट और समृद्ध है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) पाया जाता है, जिसे प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है। हालांकि, ओल्ड वल्र्ड गिद्धों में शामिल भारतीय गिद्ध (श्वेत-पृष्ठ गिद्ध) केवल बलरामपुर और बहराइच के सीमित क्षेत्रों में ही मिलते हैं। गरुड़ (ग्रेटर एडजुटेंट स्टार्क) महाराजगंज क्षेत्र में पाया जाता है, जबकि सारस का जनसंख्या घनत्व बहराइच में अन्य जिलों की तुलना में अधिक है। डॉ. यश्मिता ने बताया कि पूर्वांचल की जैव विविधता समृद्ध है, लेकिन भारतीय गिद्धों की प्रजातियां अधिकांश जिलों में नहीं हैं और वे केवल तराई क्षेत्र तक ही सीमित हैं। आद्र्रभूमि वे क्षेत्र हैं जो स्थायी या मौसमी रूप से पानी से ढके रहते हैं, जैसे दलदल, झीलें और नदियां शोध में यह भी सामने आया है कि जलवायु परिवर्तन आद्र्रभूमि पारिस्थितिकी को तेजी से प्रभावित कर रहा है। अनियमित वर्षा, सूखा, अचानक जलभराव और जल स्तर में बदलाव के कारण पक्षियों के भोजन, प्रजनन और प्रवासन में परिवर्तन देखा गया है। यह तथ्य भी सामने आया है कि गौरैया और कौआ, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में, कम हो रहे हैं। शहरों में पक्षी विविधता ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में खराब है। इसका मुख्य कारण निर्माण कार्य, बढ़ता शोर, प्रदूषण और जल स्रोतों का कम होना है। इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में खुले जलक्षेत्र, विविध वनस्पतियां और अपेक्षाकृत कम मानवीय हस्तक्षेप पक्षियों को बेहतर आवास प्रदान करते हैं। डॉ. यश्मिता के अनुसार, कम गहराई वाले जल स्रोतों में पक्षियों के लिए भोजन की बेहतर उपलब्धता रहती है, जो उनके अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है।
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