इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश, यूपी बोर्ड के आदेश को रद करने की मांग वाली याचिकाओं को किया निस्तारित
प्रयागराज 24 फरवरी (आरएनएस)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड ) से सम्बद्ध सभी माध्यमिक विद्यालयों में पाठ्यक्रम के अनुरूप कोई भी मुख्य पाठ्य पुस्तक, सहायक पुस्तकें, संदर्भ पुस्तक (रेफरेंस बुक), गाइड एवं अभ्यास पुस्तिका का उपयोग करने की पूरी स्वतंत्रता है। अभिभावक, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपरोक्त पाठ्य सामग्री खरीदने, पढ़ाने व पढऩे के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
कोर्ट ने यह टिप्पणी माध्यमिक शिक्षा परिषद की आठ जनवरी, 2026 की विज्ञप्ति और 31 जनवरी, 2026 के पत्र को चुनौती देने वाली मेसर्स राजीव प्रकाशन, मेसर्स जीआर बाथला एंड संस तथा मेसर्स अरिहंत पब्लिकेशंस की याचिका निस्तारित करते हुए की है। सचिव की तरफ से जारी विज्ञप्ति तथा संशोधन आदेशों को रद करने की मांग इन याचिकाओं में थी।
न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने अपने आदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाल की अधिसूचनाओं से उपजे असमंजस का निवारण करते हुए कहा है कि केवल माध्यमिक शिक्षा परिषद अथवा सरकार से निर्धारित पाठ्य पुस्तकों तक सीमित रहने की अनिवार्यता नहीं है। पाठ्यक्रम की दृष्टि से गुणवत्तापूर्ण कोई भी सामग्री पूरी तरह वैध है और उपयोग की जा सकती है।
न्यायालय ने कहा है कि प्रत्येक विद्यार्थी की समझ और ग्राह्य क्षमता समान नहीं होती है। कुछ विद्याथियों को अतिरिक्त अभ्यास, बोधगम्य, सरल व्याख्या या संदर्भ सामग्री की आवश्यकता होती है। न्यायालय ने कहा है कि केवल अतिरिक्त पुस्तकों के उपयोग के आधार पर किसी शिक्षण संस्थान या शिक्षक पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्यवाही नहीं होगी, किंतु पाठ्य सामग्री पाठ्यक्रम के अनुरूप हो।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया है कि अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक मूल्य कतई न वसूला जाय। पुस्तकें जबरन ने थोपी जाएं। पायरेटेड या नकली किताब न बेची जाए। साथ ही अनधिकृत प्रकाशन पर सख्त कार्यवाही जारी रहेगी।
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