० 3200 करोड़ के कथित शराब घोटाले की जांच में बड़ा घटनाक्रम
बिलासपुर, 03 मार्च (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी (शराब) घोटाला मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर सहित कुछ अन्य आरोपियों को जमानत प्रदान की है। जस्टिस अरविंद वर्मा की एकल पीठ ने आदेश जारी किया। इस प्रकरण में अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा और शशांक मिश्रा ने आरोपियों की ओर से पैरवी की। हालांकि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज 550 करोड़ रुपए के कथित डीएमएफ घोटाले में भी आरोपी बनाया गया है। उस मामले में जमानत न मिलने के कारण दोनों फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। जबकि नितेश पुरोहित, दीपेंद्र चावला और यश पुरोहित के जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है कथित शराब घोटाला?
प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया था कि राज्य में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान शराब नीति में बदलाव कर एक कथित सिंडिकेट के माध्यम से बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसी के अनुसार:
शराब आपूर्ति प्रक्रिया में चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को लाभ पहुंचाया गया।
कथित रूप से नकली होलोग्राम का उपयोग कर शराब की बोतलें सरकारी दुकानों के माध्यम से बेची गईं।
इस प्रक्रिया में टैक्स चोरी और राजस्व हानि के आरोप लगाए गए।
अनुमानित 3200 करोड़ रुपए के आर्थिक अनियमितता का दावा किया गया।
ईडी की जांच के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने भी प्रकरण दर्ज किया था। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, नितेश पुरोहित, दीपेंद्र चावला, सौम्या चौरसिया सहित कई अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आए थे।
जमानत प्रक्रिया का क्रम=
मामले में आरोपियों की जमानत याचिका पहले सत्र न्यायालय से खारिज हुई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में भी प्रारंभिक याचिकाएं अस्वीकार कर दी गईं। सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत नहीं दी, लेकिन कुछ समय बाद पुन: हाईकोर्ट में आवेदन करने की अनुमति दी थी। पांच माह बाद दोबारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब जमानत मंजूर कर ली है।
यह मामला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में से एक रहा है। फिलहाल जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी है।
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