नई दिल्ली ,08 मार्च (आरएनएस)। भारत और अमेरिका व्यापार समझौता अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के बड़े कानूनी झटके के बावजूद पटरी पर बना हुआ है। भारत इस समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के पक्ष में है। भारत की रणनीति साफ है कि अनिश्चितता की स्थिति में रहने से बेहतर है कि समझौते से एक ठोस रक्षा कवच तैयार कर लिया जाए, क्योंकि ट्रंप प्रशासन के पास टैरिफ थोपने के कई अन्य ‘कानूनी हथियार’ मौजूद हैं। भारत का मानना है कि ट्रंप सरकार के जाने या किसी भविष्य की ‘नरम’ सरकार का इंतजार करना आत्मघाती हो सकता है। मोदी सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद मार्च की नियत तारीख या महीना भले ही पीछे छूट गया हो, लेकिन बातचीत जारी है। अब अगले तीन से चार माह में नई कानूनी परिस्थितियों के हिसाब से शर्तों को फिर से तराशा जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि भारत अब ट्रंप सरकार के जाने या किसी भविष्य की नरम सरकार का इंतजार नहीं करना चाहता। इसके पीछे ठोस कूटनीतिक तर्क यह है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार जो फैसले ले लिए जाते हैं, वे एक तरह से चिपक जाते हैं। उन्हें बाद में हटाना लगभग असंभव होता है। सरकार का मानना है कि अगर अभी एक ‘वर्किंग डील’ नहीं हुई, तो बाद में शर्तें और भी कठिन हो सकती हैं।
00
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

