0-जहाजरानी महानिदेशक ने जारी की एडवाइजरी
नई दिल्ली,08 मार्च (आरएनएस)। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन, मिसाइल और अन्य हथियारों से लैस नावों द्वारा निशाना बनाए जाने की खबरें आई हैं. जहाजरानी महानिदेशक ने एक अलर्ट जारी किया है. इसमें फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय नाविकों को सावधानी बरतने और सतर्क रहने को कहा गया है.
शिपिंग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल, कैप्टन पी.सी. मीणा ने एक सर्कुलर में कहा, जहाज के कप्तानों और क्रू मेंबर्स से अनुरोध है कि वे आईएसपीएस कोड के नियमों के अनुसार जहाज के चारों ओर और आसपास के क्षेत्र में चौबीसों घंटे निगरानी रखें. विशेष रूप से संदिग्ध छोटी नावों, अज्ञात जहाजों, ड्रोन गतिविधियों, मिसाइल खतरों या जहाज के आसपास किसी भी असामान्य हलचल पर कड़ी नजऱ रखी जाए. किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी चिंता की जानकारी तुरंत तय किए गए रिपोर्टिंग माध्यमों से दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके.
मौजूदा सुरक्षा माहौल और इस तरह की घटनाओं के दौरान नाविकों और उनके परिवारों में होने वाली घबराहट या तनाव की संभावना को देखते हुए, कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे ज़रूरत पडऩे पर मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यवस्था करें.
सर्कुलर में कैप्टन मीणा ने कहा, शिपिंग कंपनियां और भर्ती एजेंसियां इस तरह की सहायता प्रणाली बनाने पर विचार कर सकती हैं, चाहे वह अपनी आंतरिक व्यवस्था हो या किसी प्रोफेशनल काउंसलिंग एजेंसी के साथ तालमेल बिठाकर. इससे संकट की स्थिति में नाविकों और उनके परिवारों को उचित मार्गदर्शन और भरोसा मिल सकेगा.
हाल की घटनाओं ने इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों के सामने आने वाले खतरों की गंभीर और बदलती प्रकृति को उजागर किया है. ऐसी ही एक घटना का जिक्र करते हुए कैप्टन मीणा ने बताया कि जब जहाज के रहने वाले हिस्से में दोनों तरफ से आग लग गई, तो दो नाविक अंदर ही फंस गए थे. उन्होंने कहा, बचने का एकमात्र रास्ता सामने की खिड़कियों से होकर निकलता था. हालांकि, ऐसा लगता है कि वहां कांच के पैनलों को तोडऩे के लिए पर्याप्त साधन या उपकरण उपलब्ध नहीं थे, जिसकी वजह से आपातकालीन निकास मुश्किल हो गया.
एक अन्य घटना का जि़क्र करते हुए कैप्टन मीणा ने बताया कि नाव से किए गए ड्रोन हमले में जहाज के इंजन रूम पर हमला हुआ, जिससे एक नाविक अंदर ही फंस गया और उसे वहां से सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त समय भी नहीं मिल पाया. उन्होंने कहा, एक अलग लेकिन इसी तरह की घटना में, एक अन्य व्यापारिक जहाज पर हमला हुआ, जिससे जहाज के बैलास्ट टैंक (पानी रखने वाला टैंक) को भारी नुकसान पहुंचा और पास के कार्गो टैंक भी इसकी चपेट में आ गए.
उन्होंने आगे कहा कि ये घटनाएं ड्रोन हमलों, मिसाइल प्रहारों और छोटी नावों के जरिए होने वाले हमलों जैसे खतरों की गंभीरता को दर्शाती हैं, जो इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं. कैप्टन मीणा ने कहा, जहाजरानी महानिदेशक भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए समुद्री सुरक्षा अधिकारियों, विदेशों में भारतीय दूतावासों और अन्य संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर बदलती सुरक्षा स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं.
आंकड़ों के अनुसार, भारत में सक्रिय नाविकों की संख्या काफी अधिक है. अनुमान के मुताबिक लगभग 2.85 से 3 लाख के बीच है. इनमें से कम से कम 80 प्रतिशत भारतीय नाविक विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं. पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत वर्तमान में दुनिया के 12 प्रतिशत नाविक प्रदान करता है और विश्व समुद्री उद्योग को नाविकों की आपूर्ति करने वाले देशों की सूची में तीसरे स्थान पर है.
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