जीनीएलयू – एसआईएलएफ़ रिपोर्ट में क्रिप्टो एसेट्स के नियमन के लिए विभिन्न मॉडल प्रस्तावित
नई दिल्ली, 10 मार्च (आरएनएस)। गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) ने सोसायटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (SILF) के सहयोग से मंगलवार को अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट “Crypto-Assets in India: Assessing the Case for Regulation” को औपचारिक रूप से जारी किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित द ललित होटल में आयोजित किया गया। रिपोर्ट में भारत में क्रिप्टो एसेट्स को लेकर मौजूदा नीतिगत स्थिति का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है और एक ऐसे नियामक ढांचे की आवश्यकता बताई गई है जो नवाचार, निवेशक संरक्षण और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रख सके। रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल एसेट्स के लिए नियम तय करने के मामले में भारत इस समय एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। हाल के वर्षों में सरकार ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर कराधान तथा क्रिप्टो से जुड़े प्लेटफॉर्म्स को मनी लॉन्ड्रिंग रोधी नियमों के दायरे में लाने जैसे कुछ कदम उठाए हैं। इसके बावजूद अभी तक इस क्षेत्र के लिए कोई स्पष्ट और अलग कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है, जिसके कारण बाजार से जुड़े पक्षों के सामने नीतिगत अनिश्चितता बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से विकसित हो रहे वैश्विक वेब3 क्षेत्र में भारत की भागीदारी को मजबूत बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक नियामक व्यवस्था आवश्यक है।
रिपोर्ट में क्रिप्टो एसेट्स के लिए विभिन्न संभावित नियामक मॉडल का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही यह सुझाव भी दिया गया है कि जब तक एक व्यापक और मजबूत नियामक ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक सरकार की निगरानी में स्व-नियमन (Self Regulation) का एक मॉडल अपनाया जा सकता है।
रिपोर्ट के विमोचन कार्यक्रम में न्यायपालिका, विधि क्षेत्र, नीति विशेषज्ञों तथा डिजिटल एसेट उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत में क्रिप्टो विनियमन की दिशा पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी उपस्थित रहीं। उन्होंने डिजिटल एसेट्स से जुड़े उभरते कानूनी और नियामक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। अन्य प्रमुख वक्ताओं में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. आर. शाह, गुजरात हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि त्रिपाठी, सोसायटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (SILF) के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन तथा गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. शांताकुमार शामिल रहे।इस प्रोजेक्ट का मार्गदर्शन एक सलाहकार बोर्ड द्वारा किया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. आर. शाह, गुजरात हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि त्रिपाठी, गुजरात सरकार के पूर्व मुख्य सचिव राजकुमार, गुजरात सरकार के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव जे. पी. गुप्ता, पूर्व डीजीपी एवं एंटी करप्शन ब्यूरो के निदेशक डॉ. केशव कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता एन. एस. नप्पिनाई, आईआईएम विशाखापत्तनम में डॉ. बी. आर. आंबेडकर चेयर प्रोफेसर प्रो. विजया भास्कर मरिसेट्टी, ब्लॉकचेन, एआई, फिनटेक और कानून विशेषज्ञ तथा ILTES के संस्थापक प्रो. एम. के. भंडारी, ऑनलाइन विवाद समाधान विशेषज्ञ चित्तु नागराजन, अधिवक्ता मिताली गुप्ता, फ्लूगेलसॉफ्ट ग्रुप ऑफ कंपनियों के प्रबंध निदेशक कल्याणजीत हातिबारुआ तथा अभिनेता कबीर बेदी शामिल हैं।

