नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने लगाया था गंभीर आरोप
नकुल कुमार मंडल
कोलकाता 13 मार्च (आरएनएस)। स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने आरोप लगाया है कि नई दिल्ली स्थित लाल किला परिसर में बने नेताजी संग्रहालय से नेताजी की ऐतिहासिक टोपी गायब है। लेकिन उनका यह दावा सरकार के दिए गए बयान से झूठा साबित हुआ।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी टोपी उस समय ऑनलाइन बहस का केंद्र बन गई जब परिवार के एक सदस्य ने उसके स्थान को लेकर चिंता जताई। अधिकारियों ने बाद में स्पष्ट किया कि कलाकृति को एक प्रदर्शनी के लिए सुरक्षित रूप से स्थानांतरित कर दिया गया था।
बता दे कि, विवाद तब शुरू हुआ जब नेताजी के पोते ने ऑनलाइन यह दावा करते हुए चिंता जताई कि लाल किले स्थित नेताजी संग्रहालय से उनकी प्रतिष्ठित टोपी गायब हो गई है। कुछ ही घंटों के भीतर, अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर घटना की सच्चाई बताई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने गुरुवार रात एक्स पर दावा किया कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ नेताजी की टोपी स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंपी थी। प्रधानमंत्री ने 23 जनवरी 2019 को नेताजी की जयंती के अवसर पर इस टोपी को लाल किले के नेताजी संग्रहालय में प्रदर्शित किया था। उन्होंने बताया कि हाल ही में ओपन प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी से जुड़े एक अधिवक्ता नवीन बामेल संग्रहालय गए। वहां जिस कांच के बॉक्स में टोपी रखी गई थी वह खाली मिला। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों से पूछने पर भी इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। चंद्र कुमार बोस ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि नेताजी देश के सबसे बड़े नेताओं में से एक हैं और इस तरह किसी ऐतिहासिक धरोहर का गायब होना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप कर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह ऐतिहासिक वस्तु वास्तव में खो गई है तो इसे एक तरह का अनादर माना जाएगा। उक्त आरोप के तुरंत बाद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने एक स्पष्टीकरण जारी किया। एएसआई के अनुसार, टोपी बिल्कुल भी गायब नहीं हुई थी।अधिकारियों ने बताया कि इस कलाकृति को हाल ही में पोर्ट ब्लेयर में आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी के लिए लाल किला संग्रहालय से निकाला गया था। यह प्रदर्शनी 19 से 25 जनवरी, 2026 तक चलने वाले पराक्रम दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित की गई थी। उस दौरान, स्मारक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में श्री विजयपुरम में टोपी को प्रदर्शित किया गया था। प्रदर्शनी समाप्त होने के बाद, कलाकृति को वापस दिल्ली लाया गया। बहरहाल एएसआई के अधिकारियों ने बताया कि टोपी को सुरक्षित रूप से लाल किला संग्रहालय में लौटा दिया गया है। हालांकि, इसके तुरंत बाद एक और अप्रत्याशित समस्या सामने आई। जिस केस में टोपी रखी थी, उसके ताले में खराबी आ गई। इस तकनीकी समस्या के कारण, संग्रहालय अधिकारियों ने टोपी को अस्थायी रूप से निकालकर सुरक्षित स्थान पर रख दिया ताकि कलाकृति को सुरक्षित रखा जा सके।
ताला ठीक हो जाने के बाद, अधिकारियों ने पुष्टि की कि टोपी को फिर से प्रदर्शन के लिए रख दिया जाएगा। इसी बीच, उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पार्थिव अवशेष जापान से भारत लाने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिकाकर्ता आशीष राय की ओर से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।
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