लखनऊ ,14 मार्च (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्नाय थ ज हरियाणा के कैथल में ब्रह्मलीन महंत पीर गणेश नाथ की स्मृति में आयोजित आठ मान भंडारा, देशमेल एवं शंखाढाल कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह आयोजन पूज्य महंत पीर गणेश नाथ के शिष्य महंत देवनाथ द्वारा अपने गुरु की स्मृति में आयोजित किया गया है, जो भारतीय सनातन परंपरा में गुरुजनों और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की महान परंपरा का प्रतीक है।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यह परंपरा रही है कि व्यक्ति अपने जीवन में सम्मान देता है और उनके भौतिक रूप से हमारे बीच न रहने के बाद भी उनके प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करता है। उन्होंने कहा कि “कृते च प्रति कर्तव्यम् एष धर्म: सनातन:” अर्थात यदि किसी ने हमारे जीवन में योगदान दिया है तो उसके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना ही वास्तविक सनातन धर्म है। यही कारण है कि सनातन संस्कृति में बड़ों का सम्मान सर्वोच्च मूल्य माना गया है।मुख्यमंत्री ने पंजाब और हरियाणा की भूमि को वीरता और भक्ति की भूमि बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र की रज-रज में संतों, सिद्धों और सिख परंपरा का प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने एक ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब सिकंदर विश्व विजेता बनने की महत्वाकांक्षा लेकर भारत आया था, तब उसे बताया गया कि यहां एक सिद्ध योगी हैं जिनकी वाणी सिद्ध होती है। सिकंदर ने उन्हें बुलाने का प्रयास किया, लेकिन योगी ने यह कहकर आने से मना कर दिया कि विश्व विजेता कोई मनुष्य नहीं हो सकता, ईश्वर ही सर्वोच्च है। बाद में जब सिकंदर स्वयं उनके पास पहुंचा तो योगी ने स्पष्ट कहा कि वह केवल मनुष्य को पहचानते हैं और ईश्वर से बड़ा कोई नहीं हो सकता। अंतत: सिकंदर को अपनी सेना के सामने उस योगी के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा।मुख्यमंत्री ने कहा कि उस सन्यासी ने सिकंदर को चेतावनी देते हुए कहा था कि यह भारत की भूमि है और यदि वह आगे बढ़ेगा तो लौट नहीं पाएगा। यह भारत के संतों और सन्यासियों की वह परंपरा है जिसने सदैव राष्ट्र, धर्म और समाज के प्रति समर्पण को सर्वोच्च स्थान दिया है। इसी कारण आज भी गांव-गांव और शहर-शहर में लोग संतों के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं और यही संस्कार समाज को शक्ति प्रदान करते हैं।उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा की भूमि ने ऐसे अनेक सिद्धों और संतों की परंपरा को आगे बढ़ाया है जिन्होंने देश की सुरक्षा और समाज की रक्षा के लिए चेतना जागृत की। यदि संत शक्ति जागृत रहे और ईमानदारी के साथ धर्म और सत्य के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र चेतना को मजबूत करती रहे, तो दुनिया की कोई ताकत भारत और सनातन धर्मावलंबियों का बाल भी बांका नहीं कर सकती।मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धा और समर्पण का भाव व्यक्ति को विनम्र बनाता है और उसे अपने कर्तव्यों का बोध कराता है। यह भावना हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और समाज के लिए योगदान देने की प्रेरणा देती है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि जो लोग देशहित में कार्य कर रहे हैं उनका सहयोग करें और जो लोग देश और धर्म विरोधी आचरण कर रहे हैं उन्हें समाज में स्वीकार न करें।उन्होंने कहा कि भारत के करोड़ों लोग लंबे समय से अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण की प्रतीक्षा कर रहे थे। कई लोग अयोध्या नहीं गए होंगे, लेकिन उनके मन में यह भावना थी कि भगवान राम भारत की सनातन परंपरा के प्रतीक हैं। लगभग 500 वर्ष पूर्व विदेशी आक्रांता द्वारा राम जन्मभूमि स्थल को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था और लंबे समय तक संघर्ष चलता रहा। उन्होंने कहा कि जब नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तब इस अभियान को नई ऊंचाइयां मिलीं और आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया तथा रामलला विराजमान हो गए।मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन उन्होंने लोगों की आस्था के विषय में गंभीरता से नहीं सोचा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई दल तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति में उलझे रहे। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य में समान सोच वाली सरकारें होती हैं, तभी बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक कार्य संभव हो पाते हैं। आज उत्तर प्रदेश में लोगों को सुरक्षा की गारंटी मिली है और अयोध्या ने पूरे देश को आस्था की गारंटी दी है। इसी तरह काशी में काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास और उज्जैन में महाकाल महालोक का निर्माण हुआ है, जबकि उत्तराखंड में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में भी भव्य विकास कार्य किए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में कश्मीर और नक्सलवाद जैसी समस्याएं भी उन नीतियों का परिणाम हैं जो तुष्टीकरण के आधार पर अपनाई गई थीं। जब देश में जनचेतना जागृत हुई तो लोगों ने महसूस किया कि सनातन और राष्ट्र के साथ अन्याय हुआ है। जनता ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर विश्वास जताया और आज भारत उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है जिस दिशा में जनता देश को देखना चाहती है।उन्होंने कहा कि कुछ लोग आज भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। कभी लोकसभा अध्यक्ष, कभी निर्वाचन आयोग और कभी न्यायपालिका पर उंगली उठाई जाती है। लेकिन भारत की जनता ऐसे लोगों को स्वीकार नहीं करेगी जो सनातन और देश को कमजोर करने का प्रयास करते हैं।मुख्यमंत्री ने युवाओं के बीच नशे के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का दुश्मन पाकिस्तान नशे के कारोबार के माध्यम से देश को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। समाज को इस खतरे के प्रति जागरूक करना होगा और नशे के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा करना होगा। उन्होंने कहा कि नशे के सौदागर देश के दुश्मन हैं और उन्हें किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी ऊर्जा और प्रतिभा से भरपूर है। अवसर मिलने पर युवाओं ने देश और दुनिया में अपनी क्षमता का परिचय दिया है। इसलिए युवाओं के भविष्य से किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने देना चाहिए। धर्म सभाओं के माध्यम से समाज को जागरूक करने और सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया जाना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म स्थल केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं होते, बल्कि वे राष्ट्र चेतना के केंद्र भी होते हैं। इन केंद्रों को समरसता और सामाजिक एकता का प्रतीक बनना चाहिए, जहां हर व्यक्ति बिना भेदभाव के अपनी आस्था व्यक्त कर सके। उन्होंने कहा कि जब समाज जातियों और आपसी मतभेदों में बंट जाता है तो देश कमजोर हो जाता है और उसी कमजोरी का लाभ उठाकर विदेशी आक्रांता भारत में प्रवेश करते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज स्वतंत्र भारत में अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं है और देश नई शक्ति और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत आज विश्व की सबसे बड़ी ताकत बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि आज यहां इतना विशाल आयोजन हो रहा है, जो दुनिया के किसी अन्य देश में दुर्लभ है।उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता का माहौल है, लेकिन भारत अपने किसानों के पुरुषार्थ और मजबूत नेतृत्व के मार्गदर्शन में निरंतर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब 145 करोड़ भारतीयों को अपने नेतृत्व पर विश्वास जताकर देश के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि अफवाह और अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ समाज को सजग रहना होगा और “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के निर्माण के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि देश सुरक्षित रहेगा तो सनातन भी सुरक्षित रहेगा और यदि सनातन सुरक्षित रहेगा तो देश भी सुरक्षित रहेगा, क्योंकि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।इस अवसर पर संत समाज के प्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
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