सरधना 15 मार्च (आरएनएस)। नानू-मेरठ रोड पर मंढियाई गांव के सामने मैदान में लगी घोड़ा और खच्चरों की पैंठ में शनिवार को दूर-दराज से आए खरीददारों की भीड़ उमड़ पड़ी। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और आसपास के जिलों से व्यापारी घोड़े व खच्चर खरीदने पहुंचे। शामली के व्यापारी अमरदीप की मारवाड़ी नस्ल की घोड़ी ‘काजलÓ मुख्य आकर्षण रही। इसे मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना निवासी व्यापारी काला ने 16 लाख में खरीदा। अमरदीप ने बताया कि उनकी मारवाड़ी नस्ल की काले रंग की घोड़ी है। इसका नाम काजल है।
लगभग छह माह पूर्व उन्होंने उसे पंजाब के अमृतसर से खरीदा था। जिसकी उम्र आठ माह है और ऊंचाई 57 इंच है। अमरदीप ने बताया कि काजल के पिता का नाम गोल्डन कांटा और मां शानदार लाइन है। पैंठ में जम्मू-कश्मीर, हरियाणा व पंजाब और आसपास के जिलों के व्यापारी पहुंचे। पैंठ में मारवाड़ी व नुकरा नस्ल के हैं घोड़ा: पशु पालकों ने बताया कि पैंठ में केवल मारवाड़ी व नुकरा नस्ल के घोड़े आए हैं। इनका प्रयोग प्रजनन और शादियों में किया जाता है। पैंठ में है 40 हजार से लेकर ढाई लाख रुपये तक के खच्चर: पैंठ में 40 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये कीमत के खच्चर बिक्री के लिए आए हैं। इन्हें खरीदने और बेचने को आसपास के कई जिलों से व्यापारी पहुंचे हैं।
हापुड़ के व्यापारी विवेक ने बताया कि पैंठ में करीब 40 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक के खच्चर मौजूद हैं। इन खच्चरों का उपयोग मुख्य रूप से ईंट-भट्टों पर ईंट ढोने और पहाड़ी क्षेत्रों में सामान ले जाने के लिए किया जाता है।
रंग और कद काठी देखे लगती है घोड़े और खच्चर की कीमत: पशुपालकों ने बताया कि घोड़े खरीदते समय सबसे पहले उसकी नस्ल देखी जाती है। नस्ल से ही घोड़े की कद-काठी, ताकत और रंग का महत्व होता है। अच्छी नस्ल के ऊंचे कद और मजबूत शरीर वाले घोड़े की कीमत अधिक लगती है। वहीं, खच्चरों की कीमत भी उनके शरीर की बनावट और रंग को देखकर तय की जाती है।
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