-अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज कार्यशाला में देश-विदेश के 1500 विशेषज्ञों ने किया मंथन, आधुनिक उपचार और लाइफस्टाइल सुधार पर जोर
अयोध्या 15 मार्च (आरएनएस)। रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया, उत्तर प्रदेश (आरएसएसडीआई-यूपी) की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज कार्यशाला का भव्य उद्घाटन हुआ। तीन दिवसीय इस कार्यशाला में देश-विदेश के लगभग 1500 विशेषज्ञ चिकित्सक मधुमेह के आधुनिक इलाज, नई दवाइयों और रोकथाम के उपायों पर मंथन कर रहे हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों ने किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए चंपत राय ने कहा कि यह कोई राजनीतिक सम्मेलन नहीं बल्कि ऐसे चिकित्सकों का मंच है जो समाज को रोगमुक्त बनाने के लिए अनुसंधान और सेवा के भाव से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल सम्मेलन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके बाद समाज में स्वास्थ्य के क्षेत्र में ठोस कार्य होना भी आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि मधुमेह जैसी बीमारियों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि आम लोग समय रहते सतर्क हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि आज मधुमेह से संबंधित कई उपयोगी उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन वे महंगे होने के कारण आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं। शोध और प्रयास के माध्यम से इन्हें सस्ता बनाना भी समय की जरूरत है। चंपत राय ने कहा कि इतने बड़े आयोजन के लिए लखनऊ के बजाय अयोध्या का चयन होना भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है और यह परमात्मा का आशीर्वाद है। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने उद्घाटन के दौरान कहा कि डॉक्टर और पुलिस दोनों ही पेशे बेहद चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण होते हैं, और वे स्वयं इन दोनों जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यस्त और तनाव भरी जीवनशैली के कारण कई बीमारियां, विशेषकर डायबिटीज, तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपने जीवन में तनाव को कम करने, नियमित व्यायाम करने और संतुलित दिनचर्या अपनाने पर ध्यान दें, ताकि मधुमेह जैसी बीमारियों से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना ही बेहतर जीवन की कुंजी है। कार्यक्रम में मुंबई के जे.जे. ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के प्रोफेसर डॉ. दीपक जुमानी ने कहा कि मधुमेह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल से जुड़ा रोग है। उन्होंने बताया कि दैनिक दिनचर्या और खानपान में सकारात्मक बदलाव लाकर कई मामलों में बिना दवा के भी इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी। डॉ. जुमानी ने कहा कि अयोध्या आकर उन्हें आध्यात्मिक और सकारात्मक वातावरण का अनुभव हुआ। आयोजन सचिव डॉ. शिवेंद्र सिन्हा ने बताया कि कार्यशाला में चार प्रमुख व्याख्यान सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मधुमेह के आधुनिक उपचार, नई दवाइयों, तकनीकों और रोकथाम के उपायों पर अपने अनुभव साझा करेंगे। इसके साथ ही 12 मेडिकल कॉलेज के पोस्ट-ग्रेजुएट विद्यार्थियों के लिए क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी, ताकि युवा चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से परिचित कराया जा सके।
कुशीनगर से आईं डॉ. भावना ने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस चिकित्सा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र होकर मधुमेह, हाइपरटेंशन और रेस्पिरेटरी मेडिसिन जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति को भी समय-समय पर फुल बॉडी चेकअप कराना चाहिए, जिससे किसी भी बीमारी का समय रहते पता चल सके और उपचार आसान हो। इस दौरान कार्यक्रम में डॉ. के.एस. मिश्रा, डॉ. आकांक्षा वर्मा, डॉ. पी.डी. त्रिपाठी, डॉ. वीरेंद्र वर्मा, डॉ. सौरभ जायसवाल, डॉ. डिंपल सिन्हा,डॉ. विमलेश वर्मा, डॉ. सी.एम. सिंह, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया सहित चिकित्सा और प्रशासनिक क्षेत्र के कई वरिष्ठ चिकित्सक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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