-यूजीसी कानून के विरोध में शांभवी पीठ के पीठाधीश्वर ने दिया बयान
मिल्कीपुर-अयोध्या 15 मार्च (आरएनएस)। कुमारगंज पहुंचे शांभवी कर्नाटक पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने पत्रकारों से बातचीत में यूजीसी कानून 2026 का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ी है।स्वामी आनंद स्वरूप ने यूजीसी कानून को एक सोची-समझी राजनीतिक चाल बताया। उनके अनुसार, यह केवल वोट लेने का एक तरीका और हिंदू धर्म को बांटने की साजिश है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि जब देश अपनी आजादी के 75 वर्ष मनाकर 80वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है, तब भी यूजीसी एक्ट और आरक्षण जैसे मुद्दे समाज को पीछे धकेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून समाज में वैमनस्य पैदा करेगा और इसे तोडऩे का काम करेगा। स्वामी आनंद स्वरूप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवर्ण समाज को समाप्त करने और एक ऐसी व्यवस्था लागू करने का आरोप लगाया, जिससे नैसर्गिक रूप से पराक्रमी और बुद्धिमान सवर्ण समाज कमजोर होगा। स्वामी आनंद स्वरूप ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनका विरोध यूजीसी कानून की वापसी और हिंदू धर्म को न तोडऩे को लेकर है। उन्होंने चतुर वरणीय व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) को चार भाइयों के समान बताया और कहा कि उनका उद्देश्य इन चारों को एकजुट करना है, जबकि राजनीति हमेशा तोडऩे का काम करती है। उन्होंने संत और नेता के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि नेता राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को पिछड़ा या दलित बनाते हैं, जबकि संत सभी को आगे बढ़ाने और ऊंचा उठाने की बात करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि वह एक संत होने के नाते चारों वर्णों को जोडऩे की बात करते हैं, क्योंकि वर्णीय व्यवस्था प्रगति के लिए है, लेकिन नेता समाज को तोडऩे का काम कर रहे हैं। शांभवी पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी जनता से बड़ी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से बड़ी इस देश की जनता है। उन्होंने कहा कि गणराज्य में हमेशा गण बड़ा होता है। उन्होंने कहा कि अगर हम पब्लिक के खिलाफ अगर न्यायपालिका भी आई। तो हम लोग न्यायपालिका के खिलाफ भी विद्रोह करने में कसर नहीं रखेंगे।
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