जालोर/लखनऊ 16 मार्च (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मातृशक्ति से आह्वान किया कि छोटी उम्र के बच्चों को रोने या नाराज होने दें, लेकिन उन्हें स्मार्टफोन बिल्कुल न दें। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग समय की बर्बादी के साथ आंखों को नुकसान पहुंचा रहा है और यह सोचने की क्षमता को कमजोर कर रहा है। इससे लोग डिप्रेशन का शिकार भी हो रहे हैं। बच्चों को यदि स्मार्टफोन की जगह अच्छी पुस्तकों, योग और व्यायाम की ओर प्रेरित किया जाए तो उनका जीवन अधिक सुंदर और व्यवस्थित बन सकता है।राजस्थान दौरे के दूसरे दिन सोमवार को मुख्यमंत्री जालोर में श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर (सिरे मंदिर) के 375 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय महायज्ञ और विशाल धर्मसभा में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने युवा पीढ़ी को भी संयमित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा उतना ही स्मार्टफोन प्रयोग करें, जितना आवश्यक हो। परिवार के लिए समय निकालें और आपस में संवाद करें। भोजन और पूजा के समय फोन न उठाएं और बाद में कॉल बैक करें। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन का लगातार उपयोग एक समय बाद डिप्रेशन जैसी समस्याएं पैदा करता है और छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में विफलता मिलने पर घबराने के बजाय उसके कारणों को समझकर उसे सफलता में बदलने का प्रयास करना चाहिए।मुख्यमंत्री ने नशे के खिलाफ भी लोगों से जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के दुश्मन और नशे के सौदागर युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में लेना चाहते हैं। समाज के हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि नशे के कारोबारियों को परिवार, समाज, नगर, कस्बे या गांव में कहीं भी पनपने नहीं दिया जाएगा। किसी भी देश के भविष्य का आकलन उसकी युवा पीढ़ी से होता है और यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ रहे हों तो देश भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य को संचय और हड़पने की प्रवृत्ति से दूर रहकर जरूरतमंदों तक संसाधन पहुंचाने का भाव रखना चाहिए। उन्होंने सिरे मंदिर के आसपास बंदरों का उदाहरण देते हुए कहा कि एक बंदर को रोटी देने पर वह तब तक दूसरी रोटी नहीं लेता जब तक पहली खत्म न कर ले। मनुष्य को भी इस प्रकार की शालीनता और संतुलन सीखना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता उसकी विविधता और समन्वय की संस्कृति है। शिव परिवार का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जहां विरोधी प्रकृति के प्रतीक भी एक साथ रहते हों और जीवन चक्र को संचालित करते हों, वही भारत की संस्कृति है। ऋषि-मुनियों की साधना, वीर-वीरांगनाओं के बलिदान, किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता और श्रमिकों के पसीने से भारत का निर्माण हुआ है। समाज का हर वर्ग मिलकर योगदान देता है, तभी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारतÓ का निर्माण होता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म समाज को जोडऩे का माध्यम है, जबकि जातिवाद व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने संत परंपरा और आश्रमों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में ऋषि-मुनियों की परंपरा ने समाज को दिशा दी है और लोककल्याण के अनेक कार्य किए हैं।उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध विरासत के संरक्षण की जिम्मेदारी भी हम सभी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश एकजुट होकर आगे बढ़ रहा है और भारत विश्व की बड़ी ताकत बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारें आस्था को अंधविश्वास मानती थीं, लेकिन आज देश अपनी सांस्कृतिक विरासत और आस्था के साथ आगे बढ़ रहा है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण इसका बड़ा उदाहरण है।मुख्यमंत्री ने कहा कि देश वीरों और वीरांगनाओं के बलिदान से बना है। चित्तौडग़ढ़ में रानी पद्मिनी के जौहर और जालोर क्षेत्र की वीरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह भूमि पराक्रम और त्याग की परंपरा से समृद्ध रही है। उन्होंने सिरे मंदिर की ऐतिहासिकता, बारीक कारीगरी और शिलालेखों का भी उल्लेख किया।कार्यक्रम में महंत पीर गंगानाथ, तिजारा के विधायक महंत बालकनाथ, महंत नरहरि नाथ, महंत संध्यानाथ, महंत गिरिवर नाथ, महंत काशीनाथ, महंत रूपनाथ, महंत पंचमनाथ, महंत सुंदराई नाथ, महंत नारायण नाथ, महंत मंगलाई नाथ, महंत विक्रमनाथ, महंत अतराई नाथ और महंत योगी कमलनाथ सहित अनेक संत और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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