राजनांदगांव,16 मार्च 2026(आरएनएस) ऑनलाइन निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी के मामले में राजनांदगांव पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए पीडि़त को 85 लाख रुपये से अधिक की राशि वापस दिलाई है। साइबर फ्रॉड के मामलों में जिले में पहली बार इतनी बड़ी रकम एक साथ वापस कराए जाने से पीडि़त को बड़ी राहत मिली है।मिली जानकारी के अनुसार डोंगरगांव निवासी विपिन कुमार गोस्वामी ने थाना डोंगरगांव में शिकायत दर्ज कराई थी कि पॉलीस फाइनेंस लिमिटेड नामक ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर उनसे विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से निवेश के नाम पर पैसे जमा कराए। इस तरह आरोपियों ने उनसे कुल 1 करोड़ 14 लाख 52 हजार रुपये की ठगी कर ली। शिकायत के आधार पर थाना डोंगरगांव में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(3), 318(4) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(घ) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन में मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के नेतृत्व में थाना डोंगरगांव और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान सीडीआर विश्लेषण, बैंक खातों के ट्रांजेक्शन की पड़ताल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर करीब 397 बैंक खातों को साइबर पोर्टल के माध्यम से होल्ड कराया गया, जिनमें ठगी की राशि ट्रांसफर की गई थी।मामले की जांच के दौरान पुलिस टीम को आरोपी के तार मुंबई तक जुड़े होने की जानकारी मिली, जिसके बाद टीम को महाराष्ट्र भेजकर संबंधित कंपनी की गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। लगातार तकनीकी विश्लेषण और प्रयासों के बाद ठगी की गई कुल राशि 1 करोड़ 3 लाख 20 हजार रुपये में से 85 लाख 31 रुपये को होल्ड कराकर माननीय न्यायालय के आदेश से पीडि़त के खाते में वापस कराया गया।इतनी बड़ी राशि वापस मिलने पर प्रार्थी विपिन कुमार गोस्वामी ने राजनांदगांव पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इस पूरी कार्रवाई में डीएसपी अलेक्जेंडर किरो, प्रशिक्षु आईपीएस आदित्य कुमार, निरीक्षक उपेंद्र कुमार शाह, निरीक्षक विनय पम्मार, निरीक्षक आशीर्वाद राहटगांवकर तथा साइबर सेल की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।राजनांदगांव पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि टेलीग्राम, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से मिलने वाले निवेश के लालच में न आएं। ऐसे अधिकांश लिंक साइबर ठगी के माध्यम होते हैं। किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने को दें।
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