-इमामबाड़ा जवाहर अली खां में आयोजित श्रद्धांजलि सभा बनी भाईचारे व सौहार्द की मिसाल
अयोध्या 16 मार्च (आरएनएस)। ईरान के सुप्रीम लीडर, आलमे इंसानियत के प्रतीक और न्याय के अलमबरदार शहीद आयातुल्लाह सैय्यद अली हुसैनी खामनेई की शहादत पर रविवार रात्रि इमामबाड़ा जवाहर अली खां में आयोजित श्रद्धांजलि एवं प्रतिरोध सभा में अत्याचार और अत्याचारी के खिलाफ एकजुट होने के गहन स्वर गूंज उठे। यह सभा मात्र शोक-सम्मेलन नहीं थी, बल्कि आपसी भाईचारे, सौहार्द और मानवता की रक्षा के लिए एक मजबूत संकल्प की प्रतीक बनी।
उलेमाओं, बुद्धिजीवियों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने शहीद खामनेई की शहादत को मानवता के लिए एक महान कुर्बानी करार दिया। उन्होंने सभी से अपील की कि अब समय आ गया है जब धर्म-जाति के बंधनों को तोड़कर हर जगह, हर रूप में हो रहे अत्याचार के विरुद्ध एक सुर में खड़े हो जाएं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की कड़ी निंदा की गई। उन्हें मानवता और मानवाधिकारों का सबसे बड़ा शत्रु बताया गया। सभा का संचालन प्रोफेसर मिर्जा शहाब शाह व हामिद जाफर मीसम ने किया। सभा की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध मौलाना इमाम-ए-जुमा जमात सैय्यद अहमद अली आब्दी ने भावुक होकर कहा, आपने सूरज को उगते देखा होगा जब वह चरम पर पहुंचता है, तो ज्यादा देर नहीं टिकता। आज अमेरिका और इजराइल भी अपनी चरम सीमा पर हैं, और ढलने वाली हैं। उन्होंने आगे कहा, जो आज खामोश रहकर इन जुल्मों का तमाशा देख रहे हैं, याद रखें यह सब गुजर जाएगा। जुल्म की शाम ढल रही है, और शहीद खामनेई की शहादत इसका रंग लाएगी। मौलाना ने श्रीमद्भगवद्गीता से उदाहरण देते हुए कहा, भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब अवतार होता है,वसीका अरबी कॉलेज के प्रधानाचार्य मौलाना मोहम्मद मोहसिन ने शहीद खामनेई के सादगीपूर्ण जीवन का जिक्र करते हुए कहा, उन्होंने न्याय और मानवता के लिए शहादत कबूल की, लेकिन अत्याचार के आगे कभी सिर नहीं झुकाया। वे हमेशा हजरत अली अलैहिस्सलाम के दिखाए रास्ते पर चले। पूर्व मंत्री अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां ने नौजवानों को जगाते हुए कहा, जब तक आप नहीं जागेंगे, शहादतें जारी रहेंगी। सुप्रीम लीडर की शहादत आपको जगाने के लिए हुई है उन्होंने याद दिलाया, 56 मुल्क एक होकर ईरान से लड़ रहे थे क्योंकि हक और ईमान उसके पास था। आज भी वही हालात हैं। जिस ईरान ने इजराइल को रहने-बसने की जमीन दी, आज वही एहसान फरामोश हो गया,मस्जिद सराय पोख्ता के पेश-ए-नमाज मुफ्ती जियाउद्दीन कासिमी ने पवित्र कुरान का हवाला देते हुए कहा, इंशाअल्लाह, इस दुनिया से जालिमों का खात्मा होगा। जालिम का अंजाम फिरौन जैसा होगा। खामनेई की शहादत अत्याचारी के विरुद्ध दुनिया के लिए एक कुर्बानी है। युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की धरती से निकला यह संदेश दुनिया को दिखाता है कि मानवता सर्वोपरि है। साकेत महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा, इस्लाम भारत में तलवारों से नहीं, संस्कृति के रूप में आया। ट्रंप और नेतन्याहू निर्दोष बच्चों की हत्या कर युद्ध अपराधी हैं। उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मुकदमा चलना चाहिए। इसके अलावा डॉ. नजमुल हसन गनी (नेशनल सेक्रेटरी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग), पंकज पांडेय (पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय के भाई), और आदिल मुस्तफा (फैजाबाद पब्लिक स्कूल मैनेजर) ने भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। शायरे अहलेबैत दानिश फैजाबादी और अली सईद खान मशमूम ने अपने मार्मिक कलाम से सुप्रीम लीडर को खेराज-ए-अकीदत पेश किया। सभा का आगाज सैय्यद मोहम्मद खादिम द्वारा पवित्र कुरान की तिलावत से हुआ। वक्ताओं ने शोक पुस्तिका पर संदेश लिखे। इस सभा में सभी धर्मों और सम्प्रदायों के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिसने अयोध्या की मिट्टी से निकले इस संदेश को और मजबूत किया कि अत्याचार के विरुद्ध एकता ही मानवता की असली ताकत है। शहीद खामनेई की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी; यह एक नई जागृति की शुरुआत है। सभा के कनवीनर रिजवान हसनैन,गुफरान हसनैन, इमरान हुसैन फराज,अली, यूसुफ, रजा,हैदर अली, काशीफ,अहमद ज़मीर सैफी, सोहेल जैदी, ने आए हुए सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।
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