नई दिल्ली ,17 मार्च । अगर आप गर्मी के इस मौसम में नया एसी, टीवी, फ्रिज या फिर कोई नई कार खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए यह एक झटके वाली खबर हो सकती है। आगामी 1 अप्रैल से आपकी रोजमर्रा के इस्तेमाल से जुड़ी कई जरूरी चीजों की कीमतों में भारी उछाल आने वाला है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे माल की तेजी से बढ़ती कीमतों और ट्रांसपोर्टेशन के बढ़ते खर्च के कारण बाजार में इन सामानों के दाम 5 से 6 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। यानी अगले महीने से अपनी जरूरत का सामान घर लाने के लिए आपको अपनी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ेगा।
कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ी लागत ने बिगाड़ा बजट
कंपनियों द्वारा अचानक दाम बढ़ाने की तैयारी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में कच्चे माल का महंगा होना है। इलेक्ट्रॉनिक सामान और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भारी मात्रा में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, रेजिन और पॉलिमर की कीमतों में अचानक बड़ी तेजी देखने को मिली है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माल ढुलाई (फ्रेट रेट) की दरों में भी 7 से 10 प्रतिशत तक का भारी इजाफा हुआ है। जाहिर है, जब कंपनियों को प्रोडक्ट बनाने और उसे बाजार तक पहुंचाने में ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, तो वे अपनी इस बढ़ती लागत का सीधा बोझ ग्राहकों की जेब पर ही डालेंगी।
लग्जरी कारों के साथ-साथ आम गाडिय़ां भी भरेंगी उड़ान
इस महंगाई की मार से ऑटोमोबाइल सेक्टर भी अछूता नहीं रहने वाला है। कई प्रमुख कार निर्माता कंपनियां अपनी गाडिय़ों की कीमतों में 2 से 3 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। मर्सिडीज-बेंज (रूद्गह्म्ष्द्गस्रद्गह्य-क्चद्गठ्ठ5) और ऑडी (्रह्वस्रद्ब) जैसी लग्जरी कार निर्माता कंपनियों ने तो पहले ही आधिकारिक तौर पर यह घोषणा कर दी है कि वे 1 अप्रैल से अपनी कारों की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत का इजाफा करने जा रही हैं। वहीं, आम आदमी के बजट की कारें बनाने वाली कंपनियां भी अब अपने नए रेट तय करने की अंतिम प्रक्रिया में जुट गई हैं।
इलेक्ट्रॉनिक आइटम, कपड़े और जूतों पर गिरेगी महंगाई की गाज
कारोबारी रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कारें ही नहीं बल्कि हर घर की जरूरत बन चुके टीवी, फ्रिज और एयर कंडीशनर (्रष्ट) जैसे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे होने जा रहे हैं। चूंकि इन प्रोडक्ट्स में प्लास्टिक आधारित पार्ट्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसलिए कंपनियां इनकी कीमतों में 5 से 6 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती हैं। इसके अलावा जूते, सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़े और घरों में इस्तेमाल होने वाले डेकोरेटिव पेंट की कीमतों में भी 9 से 10 प्रतिशत तक का तगड़ा उछाल आ सकता है। इन सबके ऊपर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के लगभग 2 प्रतिशत कमजोर होने से भी आयात महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर कंपनियों की उत्पादन लागत और अंतत: ग्राहकों पर पड़ रहा है।
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