लखनऊ, 19 मार्च (आरएनएस )राजधानी में मोहनलालगंज पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए गैंगस्टर एक्ट में वांछित एक अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। सुनियोजित कार्रवाई के तहत पुलिस ने गैंग लीडर कमलेश सहित चार शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश जारी है।पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र सिंह सेंगर के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस उपायुक्त दक्षिणी निपुण अग्रवाल के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में गठित टीम ने 18 मार्च 2026 की रात गोसाईंगंज क्षेत्र के हबुआ पुल के पास से कमलेश, अभिलाष उर्फ अभिलाख, बाबूराम और रामचन्द्र उर्फ छोटू को गिरफ्तार किया।पुलिस के अनुसार इस गिरोह के सदस्य विभिन्न जनपदों में चोरी, डकैती और अन्य गंभीर अपराधों में संलिप्त रहे हैं। इनके खिलाफ थाना निगोहा में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।पूछताछ में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मार्च 2025 में मोहनलालगंज क्षेत्र के ग्राम भैदुआ में डकैती की योजना के दौरान गिरोह के एक सदस्य को आपसी विवाद में गोली लग गई थी। गोली की आवाज सुनकर घरवाले जाग गए, जिसके बाद आरोपी अपने घायल साथी को लेकर फरार हो गए। अत्यधिक रक्तस्राव से उसकी मौत हो गई।घटना को छिपाने के लिए अभियुक्तों ने मृतक के शव के साथ छेड़छाड़ की, गोली के निशान को शार्प वस्तु से खरोंचकर मिटाने की कोशिश की और शव को पहले पुवाल में छिपाया। बाद में उसे रेलवे ट्रैक पर रखकर आत्महत्या या दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया, जिससे शव क्षत-विक्षत हो गया। मृतक की पहचान सीतापुर निवासी सुशील चौहान के रूप में हुई, जिसके खिलाफ भी कई आपराधिक मामले दर्ज थे।पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह वारदात को अंजाम देने से पहले गांवों में रेकी करता था, मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करता था और सीसीटीवी से बचने के लिए खेतों के रास्तों का इस्तेमाल करता था। पहचान छिपाने के लिए कम कपड़े पहनते और शरीर पर तेल लगाते थे, साथ ही अंधेरी रातों में घटनाओं को अंजाम देते थे।गिरफ्तार अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास भी लंबा है। गैंग लीडर कमलेश पर लगभग 36, रामचन्द्र उर्फ छोटू पर 17, अभिलाष पर 20 और बाबूराम पर 12 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें चोरी, डकैती, गैंगस्टर एक्ट और आयुध अधिनियम के मामले शामिल हैं।पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार सभी अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा रहा है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
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