लखनऊ, (आरएनएस ) 24 जून 2026। उत्तर प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को नई पहचान देने की दिशा में गोरखपुर स्थित सिंचाई कार्यशाला खंड में आधुनिक प्रदर्शनी हॉल की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तैयार यह प्रदर्शनी हॉल अब सिंचाई विभाग की तकनीकी उपलब्धियों, ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणालियों को आम जनता, विद्यार्थियों और विशेषज्ञों के सामने प्रदर्शित करेगा।सिंचाई कार्यशाला खंड, गोरखपुर लंबे समय से प्रदेश की नहर प्रणालियों, बैराजों और जल प्रबंधन संरचनाओं के निर्माण, मरम्मत एवं रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यहां उच्च गुणवत्ता वाले हाइड्रो मैकेनिकल उपकरण, गियर सिस्टम और अन्य तकनीकी संरचनाओं का निर्माण होता रहा है, लेकिन अब तक इसकी तकनीकी क्षमता आम लोगों की पहुंच से दूर थी। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यशाला परिसर में आधुनिक प्रदर्शनी हॉल विकसित किया गया है।प्रदर्शनी हॉल में बैराजों के स्केल मॉडल, राजकीय नलकूपों के प्रोटोटाइप, पंप सेट के क्रॉस-सेक्शन मॉडल, ड्रेजिंग परियोजनाओं के मॉडल तथा सिंचाई परियोजनाओं में उपयोग होने वाले विभिन्न स्पेयर पाट्र्स और हार्डवेयर को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। इनमें कई मॉडल कार्यशील हैं, जिनके माध्यम से आगंतुक जल प्रवाह नियंत्रण और सिंचाई तंत्र की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे।इस परियोजना की विशेषता यह रही कि इसका अधिकांश कार्य विभाग के अपने इंजीनियरों और कर्मचारियों ने ही पूरा किया। सामान्य रूप से नहर गेट और मशीनरी निर्माण का कार्य करने वाले कर्मचारियों ने ही प्रदर्शनी स्टैंड, डिस्प्ले फ्रेम और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया। पुरानी मशीनरी और उपकरणों को नया रूप देकर उन्हें विभाग की तकनीकी विरासत के रूप में संरक्षित किया गया है।प्रदर्शनी हॉल में डिजिटल अनुभव क्षेत्र भी विकसित किया गया है, जहां एलईडी स्क्रीन और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से नहर गेट निर्माण, मशीन स्थापना, वेल्डिंग कार्य और जल प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और तकनीकी विशेषज्ञों को व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलेगी।विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह प्रदर्शनी हॉल इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगा। अब छात्रों को सिंचाई तकनीक और जल नियंत्रण प्रणालियों को समझने के लिए दूर-दराज की परियोजनाओं का भ्रमण नहीं करना पड़ेगा। उन्हें एक ही स्थान पर आधुनिक और पारंपरिक तकनीकों का समग्र परिचय मिलेगा।यह पहल केंद्र सरकार के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों की भावना को भी मजबूत करती है। स्थानीय संसाधनों और विभागीय विशेषज्ञता के बल पर तैयार यह परियोजना सरकारी कार्यशालाओं की क्षमता और तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।सिंचाई विभाग का मानना है कि यह प्रदर्शनी हॉल केवल एक भवन नहीं, बल्कि प्रदेश की जल प्रबंधन विरासत, तकनीकी नवाचार और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक है। आने वाले समय में यह केंद्र विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बनेगा।
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