लखनऊ, (आरएनएस ) 24 जून 2026। उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें पारंपरिक खेती से निकालकर अधिक लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री बागवानी मिशन और एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) के तहत किसानों को स्ट्रॉबेरी की उन्नत खेती से जोडऩे का अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। सरकार की इस पहल से किसान कम समय में अधिक मुनाफा अर्जित कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं।प्रदेश में लंबे समय से किसान धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे हैं, जिनमें उत्पादन लागत अधिक और लाभ अपेक्षाकृत कम मिलता है। इसी चुनौती को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसल की खेती के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया है। लगभग पांच से छह माह में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को प्रति एकड़ सात से आठ लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ देने की क्षमता रखती है।भदोही जनपद के अभोली विकास खंड स्थित सदोपुर गांव के किसान जगदीश इसकी सफल मिसाल बनकर उभरे हैं। मात्र 0.25 हेक्टेयर भूमि के मालिक इस किसान ने उद्यान विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त कर आधुनिक तकनीकों के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। मल्चिंग शीट, ड्रिप सिंचाई, उन्नत पौधों और जैविक खाद के उपयोग से उन्होंने अपनी फसल की गुणवत्ता बेहतर बनाई।इस खेती में लगभग 80 हजार रुपये की लागत आई, जबकि स्ट्रॉबेरी की बिक्री से उन्हें करीब 1.80 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। इस प्रकार एक ही सीजन में उन्हें लगभग एक लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। उनकी सफलता ने आसपास के किसानों को भी आधुनिक और व्यावसायिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है।किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार स्ट्रॉबेरी की खेती पर कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करा रही है। यह सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी प्रणाली के माध्यम से भेजी जाती है। योजना के तहत पहले वर्ष में 48 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, जबकि दूसरे वर्ष का अनुदान भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपलब्ध कराया जाता है।इसके अलावा सरकार ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। फसल की पैकेजिंग और बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए परिवहन एवं लॉजिस्टिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों को उच्च उत्पादकता वाली ‘कामरोसाÓ और ‘विंटर डॉनÓ जैसी उन्नत किस्मों की खेती का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा हैविशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाकर किसान कम भूमि में भी बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि प्रदेश में कृषि विविधीकरण को नई गति मिल रही है और किसान आधुनिक तकनीकों के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अनुदान योजनाओं का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश के किसान न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं, बल्कि राज्य को बागवानी और आधुनिक कृषि के क्षेत्र में नई पहचान भी दिला रहे हैं।यह समाचार पोर्टल, समाचार पत्र और टीवी बुलेटिन तीनों के लिए उपयुक्त शैली में तैयार किया गया है।
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