हरिशंकर व्यास
जिस तरह के कपड़ों पर से जिद्दी दाग हटाने वाले डिटरजेंट और वॉशिंग मशीन आ गए हैं उसी तरह राजनीति में भ्रष्टाचार के दाग मिटाने वाली एक बेहद कारगर वॉशिंग मशीन आ गई है। वह वॉशिंग मशीन भाजपा की है। भाजपा के अलावा बाकी हर पार्टी के नेता भ्रष्ट हैं और वंशवादी हैं। भाजपा के विधायकों, सांसदों और मंत्रियों, मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के अलावा सब भ्रष्ट हैं। चाहे वह न्यायपालिका के शीर्ष पर बैठे लोग हों या विपक्ष की राजनीति के शीर्ष लोग हों या मीडिया के लोग हैं, सब भ्रष्ट हैं।
हां, ईमानदार और साफ सुथरी सिर्फ भाजपा और उसके नेता हैं। अगर कोई कथित भ्रष्ट व्यक्ति भाजपा में शामिल हो जाता है तो तत्काल उसके दाग धुल जाते हैं और वह स्वच्छ हो जाता है। इसी तरह से अगर भाजपा के किसी नेता, मंत्री या मुख्यमंत्री पर कोई आरोप लगता हो तो आरोप लगाने वाले कितना भी विश्वसनीय क्यों न हो और आरोप कितने भी गंभीर क्यों नहीं हों उनके दाग उस पर नहीं लगते हैं।
किसी भी कीमत पर भाजपा के किसी नेता के ऊपर दाग नहीं लग सकता है। इसके लिए भाजपा ने ‘हमारे यहां इस्तीफ नहीं होताÓ का सिद्धांत प्रतिपादित किया है। कितना भी गंभीर आरोप हो भाजपा के लोग इस्तीफा नहीं देते। वैसे इस्तीफा देना किसी अपराध की सजा नहीं है। लेकिन यहां वह भी नहीं होता है। जैसे अभी एपस्टीन फाइल्स को लेकर पूरी दुनिया में हंगामा मचा है। इस्तीफा हो रहे हैं। गिरफ्तारियां हो रही हैं। ब्रिटेन में तो राजा के भाई को ही गिरफ्तार कर लिया गया। अमेरिका में ब्रिटिश सरकार के राजदूत रहे नेता की गिरफ्तारी हुई है। प्रधानमंत्री के चीफ ऑफ स्टाफ और मीडिया सलाहकार का इस्तीफा हुआ है। विश्व आर्थिक मंच के अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया है। नार्वे के पूर्व प्रधानमंत्री ने खुदकुशी करने की कोशिश की है। लेकिन भारत में?
भारत में जिसके ऊपर आरोप लगे, एपस्टीन के साथ जिसके सैकड़ों ईमेल सामने आए और कई बार मुलाकातों का ब्योरा सामने आया वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने को बेदाग बताता रहा और आरोप लगाने वालों को ही भ्रष्ट, बेईमान बताने लगा। मीडिया का एक समूह केंद्रीय मंत्री से इस्तीफा मांगने या कम से कम सवाल पूछने की बजाय मंत्री के साथ साथ दुनिया के सबसे नीच सेक्स अपराधी एपस्टीन का बचाव करने लगा। केंद्रीय मंत्री और देश के बड़े कारोबारी का नाम एपस्टीन के साथ जुड़ा लेकिन दिन भर शुचिता, ईमानदारी, त्याग, तपस्या आदि की बात करने वाले भारत में किसी के ऊपर रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ा। यह नया भारत है यहां इस्तीफा नहीं होता है।
बहरहाल, वॉशिंग मशीन की कहानी अब घर घर पहुंच गई है। भाजपा के बड़े नेता पहले दूसरी पार्टियों के बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं। किसी पर 70 हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं तो किसी पर चार हजार करोड़ रुपए का आरोप लगाते हैं। किसी को कांग्रेस आलाकमान का एटीएम बताते हैं तो किसी को दूसरी प्रादेशिक पार्टी के नेता का एटीएम बताते हैं। इसके बाद उसी नेता को गाजे बाजे के साथ अपनी पार्टी में शामिल करा लेते हैं। इस तरह उसके भ्रष्टाचार से लड़ाई संपन्न होती है। क्योंकि भाजपा में शामिल होते ही उस नेता के दाग धुल जाते हैं और वह ईमानदार हो जाता है। पुराने अधिकारी और पुराने न्यायिक अधिकारी, पहले चाहे जैसे रहे हों, भाजपा में जाते ही ईमानदार हो जाते हैं। सो, ईमानदार सिर्फ भाजपा और उसकी सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री आदि हैं। बाकी पार्टियों के नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री सब बेईमान और भ्रष्ट हैं। उनके अपने आरोप धोने का एक ही रास्ता है कि वे भाजपा में शामिल हो जाएं। न्यायपालिका से भी उनके दाग नहीं धुल सकते हैं तो भाजपा में शामिल हो से दाग धुल जाते हैं।
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