भिलाई/दुर्ग 21 मार्च (आरएनएस)अंतरराष्ट्रीय तनाव की आंच अब सीधे भिलाई के उद्योगों तक पहुंच गई है। कमर्शियल एलपीजी गैस की भारी कमी ने औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी कर दी है, जिससे उत्पादन ठप होने और हजारों श्रमिकों के रोजगार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर के दरवाजे पहुंचा और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
चेंबर के महामंत्री अजय भसीन और उद्योग चेंबर भिलाई के अध्यक्ष जितेंद्र प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर एलपीजी की आपूर्ति पर पड़ा है। इसका सीधा असर भिलाई और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों पर दिख रहा है, जहां सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं। गैस की कमी के चलते उत्पादन कार्य लगभग ठप होने की कगार पर है।
मार्च का महीना उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह वित्तीय वर्ष का अंतिम चरण होता है। इस समय कंपनियों को अपने वर्क ऑर्डर समय सीमा में पूरे करने होते हैं, लेकिन गैस की कमी ने इस पूरी प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। उद्यमियों को भारी पेनाल्टी और लगातार आर्थिक नुकसान का खतरा सताने लगा है।
स्थिति सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं है। चेंबर के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अगर यही हालात रहे तो श्रमिकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो जाएगा। हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय भी गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, जिससे उनका संचालन प्रभावित हो रहा है।
चेंबर ने प्रशासन से मांग की है कि औद्योगिक इकाइयों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाए, कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर सख्त निगरानी रखी जाए और आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने के लिए तेल कंपनियों को निर्देश दिए जाएं। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी और अपूरणीय नुकसान हो सकता है।
कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आश्वासन दिया है कि संबंधित विभागों और गैस कंपनियों से जल्द चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
यह संकट केवल गैस की कमी का नहीं, बल्कि पूरे औद्योगिक तंत्र और रोजगार की सुरक्षा का सवाल बन चुका है। समय पर हस्तक्षेप ही भिलाई की औद्योगिक धड़कन को थमने से बचा सकता है।

