रुड़की,25 मार्च (आरएनएस)। चैत्र नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की भक्ति में मंदिर गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने विधिविधान से पूजा कर माता का आशीर्वाद लिया, वहीं गुरुवार को अष्टमी पर कन्या पूजन को लेकर घर-घर में उत्साह बना हुआ है। पंडित संदीप भारद्वाज शास्त्री और महंत विपिन शर्मा ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की गई। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सातवां रूप देवी कालरात्रि है। इसलिए नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। स्याह रात्रि के समान माता का स्वरूप काला है। कालरात्रि माता के बाल खुले हुए हैं और गर्दभ की सवारी करती हैं। यह रूप काफी विकराल और भयानक है, लेकिन बहुत फलदायी है। इस दिन साधक का मन सहस्त्रार चक्र में प्रवेश कर जाता है। मां काली को शुभंकारी भी कहते हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। यह ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली देवी हैं। बताया कि गुरुवार को घरों में अष्टमी के मौके पर कन्या पूजन कर व्रत का पारण किया जाएगा।
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