कबीरधाम 26 मार्च (आरएनएस) रानीदहरा जलप्रपात के पास मिले अज्ञात महिला के शव ने जिस रहस्य को जन्म दिया था, उसे कबीरधाम पुलिस ने महज पांच दिनों में सुलझा दिया। पहचान से लेकर आरोपी की पुणे से गिरफ्तारी तक की यह कार्रवाई न सिर्फ तेज रही, बल्कि हत्या के पीछे छिपी साजिश को भी बेनकाब कर गई।कबीरधाम जिले में 19 मार्च 2026 को रानीदहरा जलप्रपात के समीप एक अज्ञात महिला का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी।

मृतिका की पहचान न होना इस मामले को बेहद जटिल बना रहा था। थाना बोड़ला में अपराध क्रमांक 34/2026 के तहत धारा 103(1), 238(क) और 61(2) बीएनएस में मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मात्र दो दिनों के भीतर मृतिका की पहचान मुंगेली जिले की निवासी सुखमती बैगा के रूप में कर ली। इसके बाद मामले को सुलझाने के लिए पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई, जिसमें तकनीकी और फील्ड जांच को साथ लेकर काम किया गया। जांच के दौरान एक टीम ने कॉल डिटेल और लोकेशन का विश्लेषण किया, जबकि दूसरी टीम ने घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ कर अहम सुराग जुटाए। वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदेह की सुई देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल की ओर गई, जो घटना के बाद से फरार था। सूचना मिलने पर पुलिस टीम को पुणे (महाराष्ट्र) रवाना किया गया, जहां से मुख्य आरोपी देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल (26 वर्ष) को गिरफ्तार कर कबीरधाम लाया गया। पूछताछ में आरोपी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उसने अपने पिता केषव प्रसाद जायसवाल और सहयोगी मनोज पटेल के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। पुलिस जांच में सामने आया कि मृतिका के साथ आरोपी का प्रेम संबंध था और समाज में बदनामी के डर से आरोपियों ने 16 मार्च की शाम उसे रानीदहरा जलप्रपात ले जाकर पत्थर से हमला कर हत्या कर दी। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के लिए शव को झरने में फेंक दिया गया। मामले की पुष्टि के लिए पुलिस ने आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर घटनास्थल पर डमी पुतले के जरिए सीन रिक्रिएट किया, जिससे पूरी वारदात का क्रम स्पष्ट हो गया। आरोपियों की निशानदेही पर घटना से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। इस मामले में देवेन्द्र प्रसाद जायसवाल, केषव प्रसाद जायसवाल और मनोज पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनके खिलाफ विधिवत कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी दक्षता, टीमवर्क और त्वरित कार्रवाई के चलते इस अंधे कत्ल का खुलासा संभव हो सका।यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि चाहे अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना अब नामुमकिन है।


