पं राम किशोर त्रिपाठी की जयंती व भगवान श्री राम का जन्मदिवस/रामनवमी महोत्सव
कादीपुर/सुल्तानपुर 27 मार्च (आरएनएस)। स्थानीय संत तुलसीदास पीजी कॉलेज कादीपुर के संस्थापक अध्यक्ष कर्मयोगी स्वर्गीय पंडित रामकिशोर त्रिपाठी की 102वीं जयंती एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मदिवस के रूप में रामनवमी के अवसर पर मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रो हरिशंकर मिश्रा द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह कितना दूर्लभ संयोग है एक तरफ समाज को शैक्षिक जीवन की सीख व सुविधा प्रदान करने वाले की तो सम्पूर्ण सनातन जनमानस को मर्यादा सामाजिकता, सौहार्द, प्रेम न्याय व आपसी भाईचारा का सन्देश देने वाले प्रभु श्रीराम का भी जन्मदिवस का अनुपम महोत्सव एक ही तिथि पर है।
प्रो मिश्रा ने अपने सम्बोधन में कहा कि रामनवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। यह भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में जाना जाता है, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। श्री राम अवतार का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना, रावण जैसे अधर्मी शक्तियों का संहार और सत्य-न्याय की रक्षा करना था। रामायण में वर्णित उनके जीवन से हमें मर्यादा, कर्तव्य, सत्य, करुणा, विनम्रता और परिवारिक मूल्यों की प्रेरणा मिलती है। वर्तमान समय के तेज़-रफ्तार, तनावपूर्ण और मूल्य-हीन होते जा रहे युग में रामनवमी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि नैतिक पुनर्जागरण और जीवन-दर्शन का प्रतीक है। आज जब व्यक्तिगत स्वार्थ, भ्रष्टाचार और नैतिक पतन आम है, राम हमें सिखाते हैं कि कर्तव्य से कभी समझौता न करने की सीख दिया, उन्होंने पिता की आज्ञा मानकर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया, भाईचारे का आदर्श प्रस्तुत किया और पत्नी सीता के प्रति समर्पण दिखाया। आधुनिक जीवन में यह रिश्तों की मर्यादा, ईमानदारी और संयम सिखाता है। रामराज्य आदर्श शासन का प्रतीक थाकृ जहां न्याय, समानता, कोई भेदभाव नहीं और प्रजा सुखी थी। आज के लोकतंत्र, राजनीति और कॉर्पोरेट जगत में नैतिक नेतृत्व, सेवा-भाव और समावेशिता की जरूरत है। प्रभु श्री राम हमें याद दिलाते हैं कि सच्चा नेता वह है जो सत्य और धर्म पर अडिग रहे, भले ही व्यक्तिगत त्याग करना पड़े। राम का जीवन हमें सामाजिक सद्भाव और एकता के लिए संबल प्रदान करता है। राम का जीवन विविधता में एकता का संदेश देता है। वे सभी वर्गों (वानर सेना, रीछ, आदि) को साथ लेकर चले। आधुनिक भारत में, जहां सामाजिक-धार्मिक तनाव बढ़ रहे हैं, रामनवमी सद्भाव, करुणा और समानता का संदेश मजबूत करती है। यह हमें सिखाती है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर विजय पाती है। व्यक्तिगत विकास और मानसिक स्वास्थ्य के सन्दर्भ में प्रभु श्रीराम का जीवन एक मार्गदर्शक का रहा है। महाविद्यालय प्रबन्ध सौरभ त्रिपाठी द्वारा आये हुए अतिथियों का माल्यार्पण व अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया गया व प्राचार्य प्रो आर एन सिंह ने सभी आये हुए अतिथियों व शिक्षक शिक्षिकाओं, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों व छात्र छात्राओ के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य प्रो इन्दुशेखर उपाध्याय, पूर्व प्राचार्य डॉ अब्दुल रसीद, पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी, पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु, विजय शंकर मिश्र भास्कर, पूर्व प्राचार्य गनपत सहाय पीजी कॉलेज डॉ अरूण कुमार मिश्रा, रामपूजन तिवारी, रमाशंकर मिश्रा, गौरव त्रिपाठी, मनीष तिवारी, संजय तिवारी, समाजसेवी जितेन्द्र सिंह, सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं शिक्षणेत्तर कर्मचारी व छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
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