लोकसभा में नियम 377 के तहत अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बढ़ते खारे पानी के मगरमच्छों के खतरे का मुद्दा उठाया
• सुनामी के बाद लगभग 3730 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा
• मगरमच्छों की संख्या व आकार में असामान्य वृद्धि, मानव सुरक्षा पर बढ़ता खतरा
• पर्यटन गतिविधियों और मानवीय हस्तक्षेप को भी समस्या का कारण बताया
• केंद्र सरकार से ठोस “क्रोकोडाइल मैनेजमेंट” एवं कंजर्वेशन प्लान लागू करने की मांग
• सुनामी के बाद लगभग 3730 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा
• मगरमच्छों की संख्या व आकार में असामान्य वृद्धि, मानव सुरक्षा पर बढ़ता खतरा
• पर्यटन गतिविधियों और मानवीय हस्तक्षेप को भी समस्या का कारण बताया
• केंद्र सरकार से ठोस “क्रोकोडाइल मैनेजमेंट” एवं कंजर्वेशन प्लान लागू करने की मांग
नई दिल्ली, 27 मार्च (आरएनएस )। सारण सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने आज लोकसभा में नियम 377 के तहत अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बढ़ते खारे पानी के मगरमच्छों (सॉल्ट वॉटर क्रोकोडाइल) के गंभीर होते खतरे का मुद्दा उठाया। सांसद रूडी ने कहा कि सुनामी के बाद अंडमान-निकोबार के बड़े भू-भाग, लगभग 3730 हेक्टेयर क्षेत्र के प्रभावित होने से वहां के पारिस्थितिक संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप खारे पानी के मगरमच्छों की संख्या और आकार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे मानव जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि वर्तमान में इन मगरमच्छों का आकार असामान्य रूप से बड़ा होता जा रहा है और उनके व्यवहार में भी आक्रामकता बढ़ी है। पर्यटन के बढ़ते दबाव, जहां हर वर्ष लाखों पर्यटक अंडमान-निकोबार पहुंचते हैं और होटलों व मानव गतिविधियों द्वारा खुले में भोजन फेंके जाने जैसी प्रवृत्तियों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। सांसद रूडी ने कहा कि स्थिति अब ऐसी हो गई है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। मगरमच्छ संरक्षित श्रेणी (शेड्यूल-1) में होने के कारण उनके प्रबंधन में भी कानूनी जटिलताएं हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। उन्होंने केंद्र सरकार, विशेषकर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से आग्रह किया कि इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक प्रभावी “क्रोकोडाइल मैनेजमेंट प्लान” तथा कंजर्वेशन नीति को शीघ्र लागू किया जाए, ताकि मानव जीवन की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
सांसद रूडी ने देशभर के पर्यावरण विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं से भी इस दिशा में ठोस पहल करने का आह्वान किया, जिससे इस उभरते संकट का समय रहते समाधान किया जा सके।
सांसद रूडी ने देशभर के पर्यावरण विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं से भी इस दिशा में ठोस पहल करने का आह्वान किया, जिससे इस उभरते संकट का समय रहते समाधान किया जा सके।

