नईदिल्ली,01 अपै्रल (आरएनएस)। संसद के बजट सत्र के दौरान आज लोकसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन विधेयक पारित हो गया है। इसके तहत अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी के रूप में औपचारिक मान्यता मिल गई है। यह कदम लंबे समय से चल रहे राजधानी विवाद को खत्म करने और ग्रीनफील्ड राजधानी परियोजना को कानूनी आधार प्रदान करने की दिशा में अहम है। हाल ही में आंध्र प्रदेश विधानसभा ने केंद्र से इस संबंध में अनुरोध किया था।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विधेयक को पेश किया, जो ध्वनि मत से पारित हो गया। कांग्रेस समेत ज्यादातर पार्टियों ने विधेयक का समर्थन किया, लेकिन वाईएसआर. कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया। पार्टी का कहना था कि इस विधेयक में उन किसानों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए समय-सीमा दी जानी चाहिए, जिन्होंने अमरावती को राजधानी बनाने के लिए अपनी जमीनें दी थीं।
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने भावुक भाषण दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक क्षण में सदन में अमरावती के पुत्र के तौर पर बोलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा, तेलुगु लोगों की स्वप्निल राजधानी और राज्य के इतिहास में ये अहम मील का पत्थर है। उन्होंने राजधानी के लिए अपनी जमीन का त्याग करने वाले किसानों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल होने वाली महिलाओं का आभार जताया।
अमरावती एक नियोजित ग्रीनफील्ड राजधानी परियोजना है। इसके लिए किसानों ने स्वेच्छा से 34,000 एकड़ से ज्यादा भूमि प्रदान की है। वहीं, कुल मिलाकर लगभग 54,000 एकड़ भूमि इस परियोजना के लिए ली गई है। अमरावती को आधुनिक ब्लू-ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 56,000 करोड़ रुपये की लागत से 91 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें सड़कों, सरकारी भवनों और अन्य ढांचों का निर्माण शामिल है।
दरअसल, जब 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना बना, तो आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत हैदराबाद को तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी बनाया गया था। ये व्यवस्था अधिकतम 10 साल तक लागू की गई थी। इसके बाद तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद और आंध्र प्रदेश को अपनी नई राजधानी स्थापित करनी थी। आंध्र प्रदेश सरकार ने अमरावती को नई राजधानी के तौर पर चिह्नित किया।
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