नईदिल्ली,01 अपै्रल (आरएनएस)। भारत अगले महीने यानी मई में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी करने जा रहा है। ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता के दौरान भारत में ये पहली प्रमुख मंत्रिस्तरीय बैठक होने जा रही है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 14 और 15 मई को इस बैठक में शामिल होने दिल्ली आएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध और मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए भारत के सामने कई चुनौतियां हो सकती हैं।
भारत लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण थीम के साथ ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शिखर सम्मेलन का लोगो जारी करते हुए कहा था कि भारत की अध्यक्षता मानवता को प्राथमिकता देने वाले समाधानों पर केंद्रित होगी। उन्होंने कहा था, वर्तमान वैश्विक परिवेश जटिल और परस्पर चुनौतियां प्रस्तुत करते हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, पेचीदा आर्थिक परिदृश्य, तकनीकी परिवर्तन और विकास में लगातार कमियां विभिन्न क्षेत्रों के देशों को प्रभावित कर रही हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंत्रिस्तरीय बैठक में भविष्योन्मुखी प्राथमिकताओं के एक समूह पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है, जिसकी शुरुआत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से होगी। जलवायु वित्त एक और प्रमुख स्तंभ होगा, जिसमें विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर बोझ डाले बिना हरित ऊर्जा परिवर्तन का समर्थन करने वाला ढांचा तैयार करने के प्रयास शामिल होंगे। साथ ही भारत समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलावों की वकालत करेगा।
ईरान युद्ध के चलते इस बैठक को समूह की एकता की पहली परीक्षा माना जा रहा है। ईरान चाहता है कि ब्रिक्स अमेरिका-इजरायल के हमलों की निंदा करे। वहीं, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात चाहते हैं कि ब्रिक्स ईरान के खिलाफ सख्त प्रस्ताव लाए। ऐसे में भारत के लिए सहमति बनाना जटिल काम होगा। माना जा रहा है कि ईरान युद्ध का मुद्दा सबसे बड़ी प्राथमिकता के साथ छाया रहेगा।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने कहा, यह भारत के लिए बहुत पेचीदा स्थिति है, क्योंकि ईरान ब्रिक्स का सदस्य है और सऊदी अरब भी। भारत और ईरान शंघाई सहयोग संगठन के भी सदस्य हैं। यह मामला इसलिए और पेचीदा हो गया है, क्योंकि ईरान ने सऊदी अरब और यूएई पर हमला किया है, जो ब्रिक्स के सदस्य हैं। ऐसे में भारत के लिए किसी का पक्ष लेना या खिलाफ जाना मुश्किल होगा।
ब्रिक्स प्रमुख उभरती हुए अर्थव्यवस्था वाले 5 देशों का समूह है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल है। 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने इसकी स्थापना की थी। 2010 में दक्षिण अफ्रीका भी शामिल हुआ। 2024 में समूह में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई को जोड़ा गया। ब्रिक्स देश वैश्विक जनसंख्या के 49.5 प्रतिशत, सकल घरेलू उत्पाद के 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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