*अधिवक्ता ऋषभ द्वारा पुन: जिलाधिकारी को दिया गया शिकायती पत्र
मीरजापुर 2 अप्रैल (आरएनएस)। बेसिक शिक्षा विभाग में नारायणपुर ब्लॉक का मामला एक बार फिर चर्चा में है। जांच अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे है, कि आखऱिकार कैसे निलंबित अध्यापक धीरज सिंह जो पिछले 10 माह से निलंबित चल रहे होने के बावजूद ब्लॉक संसाधन केंद्र शिवशंकरी धाम पर सम्बद्ध होकर पूर्व की भांति विभागीय कार्यो को पूर्ण कर रहे है। उनके खिलाफ लगाये गए आरोप की जांच हेतु नियुक्त विभागीय जांच अधिकारी विगत 10 माह के बीत जाने के बाद भी जांच आख्या नहीं दे पा रहे है या जांच आख्या प्राप्त होने के बाद भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा कोई ठोस कार्यवाही जानबूझ के नहीं की जा रही है। चर्चा है कि इस मामले की लीपापोती करने के बाद उन्हें नारायणपुर ब्लॉक में ही उनके घर के पास किसी स्कूल में तैनाती देने की तैयारी चल रही है। ऐसे में इन सब मामलों को लेकर एक बार पुन: अधिवक्ता ऋषभ सिंह द्वारा जिलाधिकारी को शिकायत पत्र देकर जांच कर कार्रवाई की मांग की है। अपने शिकायती पत्र में अधिवक्ता ने निलंबित अध्यापक द्वारा विद्यालय भवन निर्माण में सरकारी धन के गबन व दुरुपयोग के साथ-साथ उनके द्वारा बनवाये गए भवन की गुणवत्ता खऱाब होने, भवन की नींव बैठ जाने तथा दीवारों में बड़ी बड़ी दरारों के पडऩे के साथ छोटे बच्चों के जिन्दगियों के साथ खिलवाड़ करने जैसे गंभीर आरोप लगाये है। अधिवक्ता द्वारा यह भी आरोप लगाया है कि जब त्रिस्तरीय जांच समिति के सामने आरोपी के ऊपर दोष सिद्ध हो चुका है और उसे निलंबित कर दिया गया है उसके बाद भी उसपर ना ही प्राथमिकी दर्ज करके मुक़दमा किया गया ना ही सरकारी धन की वसूली हेतु कोई कार्यवाही की गई, बल्कि इससे उलट उससे विभागीय कार्य लिया जा रहा है। आरोप लगाया है कि आधार बनाने में भी धीरज सिंह द्वारा काफ़ी वित्तीय अनियमितता किया गया है। उनके द्वारा लगभग 5 लाख रुपए की हेराफेरी की गई है। आधार बनाने के सरकारी शुल्क को विभागीय खाते में आंशिक रूप से जमा किया गया है। इस मामले की जांच का भी अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा है कि विभाग के उच्चाधिकारी उनके ऊपर लगातार मेहरबान बने हुए है। आरोपी आज भी खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बाबूगिरी का कार्य कर रहा है। उसके द्वारा विभागीय ह्वाट्सऐप ग्रुप में आधिकारिक मैसेज भी लगातार भेजा जाता है। दूसरी ओर शिकायत पत्र पर जिलाधिकारी द्वारा तुरंत मामले को संज्ञान में लेकर संबधित अधिकारियों को तलब किया गया है। देखना अब यह है कि क्या कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
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