इस्लामाबाद ,04 अपै्रल ,। पाकिस्तान में आसमान छूती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के खिलाफ सड़कों पर उतरी आवाम के आगे आखिरकार शाहबाज शरीफ सरकार को झुकना पड़ा है। भारी विरोध प्रदर्शनों और पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारों के बाद पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 80 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती करने का ऐलान किया है। इस कटौती के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की नई कीमत 378 रुपये प्रति लीटर हो गई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि यह राहत सरकार के पेट्रोलियम लेवी (टैक्स) में कटौती करके दी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने यह फैसला पेट्रोल की कीमतों में 42.7 प्रतिशत का भारी इजाफा करते हुए इसे 485 रुपये प्रति लीटर करने के ठीक एक दिन बाद लिया है। पहले सरकार ने इस बढ़ोतरी का ठीकरा मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों पर फोड़ा था।
डीजल के मोर्चे पर जनता को नहीं मिली कोई राहत
टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पेट्रोल की कीमतों में की गई यह कटौती कम से कम एक महीने तक लागू रहेगी। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, वह चैन से नहीं बैठेंगे। हालांकि, पेट्रोल पर राहत देने वाली सरकार ने डीजल की कीमतों में कोई कटौती नहीं की है। हाल ही में 54.9 प्रतिशत की भारी वृद्धि के बाद पाकिस्तान में डीजल अभी भी 520 रुपये प्रति लीटर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर बिक रहा है।
भड़के लोगों को शांत करने के लिए 30 दिन फ्री बस सेवा का ऐलान
जनता के गुस्से को शांत करने के लिए पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि शनिवार से इस्लामाबाद में सभी सार्वजनिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) अगले 30 दिनों के लिए आम जनता के लिए बिल्कुल मुफ्त कर दिए जाएंगे। सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने पर 350 मिलियन रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसी तर्ज पर पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ़ ने भी राज्य द्वारा संचालित सार्वजनिक परिवहन का किराया माफ़ कर दिया है और ट्रकों तथा बसों के लिए सब्सिडी की घोषणा की है। उन्होंने परिवहन संचालकों से अपील की कि वे बढ़ी हुई लागत का बोझ यात्रियों पर न डालें। इसके अलावा सिंध प्रांत में भी मोटरसाइकिल चालकों और छोटे किसानों के लिए विशेष सब्सिडी का ऐलान किया गया है।
फ्यूल बचाने के लिए सरकार के अजीबोगरीब फरमान
पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली ऊर्जा सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है, जिसका असर पाकिस्तान पर साफ दिख रहा है। ईंधन संकट से निपटने और तेल बचाने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने कई आपातकालीन उपायों की घोषणा की है। इसके तहत कई सरकारी कार्यालयों में काम के दिन घटाकर हफ्ते में सिर्फ चार दिन कर दिए गए हैं। स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं और कुछ कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से चलाने का आदेश दिया गया है। ऊर्जा संकट का यह असर केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि बांग्लादेश जैसे अन्य एशियाई देशों में भी देखने को मिल रहा है, जहां हाल ही में एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में 29 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
आईएमएफ के दबाव में जनता को निचोड़ रही सरकार?
पाकिस्तान के इस भारी आर्थिक और ऊर्जा संकट के पीछे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (ढ्ढरूस्न) की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इस हफ्ते की शुरुआत में ही आईएमएफ ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान जैसी कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों और सप्लाई चेन में रुकावटों का भारी दबाव है। 28 मार्च को ही आईएमएफ ने पाकिस्तान के साथ 1.2 अरब डॉलर के नए सहायता पैकेज के शुरुआती समझौते की घोषणा की है। वहीं, लाहौर की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हाफिज अब्दुल रऊफ जैसे आम नागरिकों का साफ कहना है कि कीमतों में यह बेतहाशा बढ़ोतरी सिर्फ ईरान युद्ध की वजह से नहीं है, बल्कि आईएमएफ की कड़ी शर्तों और दबाव का नतीजा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपील की है कि वह आईएमएफ की मांगों के आगे झुकने के बजाय अपनी अवाम के प्रति थोड़ी हमदर्दी दिखाए।
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