ऋषिकेश 5 अप्रैल (आरएनएस)। संस्कृत शिक्षा विभाग के सचिव दीपक कुमार गैरोला ने रविवार को विभिन्न संस्कृत विद्यालयों का निरीक्षण कर वहां की गतिविधियां जानी। उन्होंने विभाग की ओर से संस्कृत छात्रों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी। संस्कृत शिक्षा विभाग के सचिव सबसे पहले श्री मुनीश्वर वेदांग संस्कृत विद्यालय पहुंचे और शैक्षिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने मायाकुंड स्थित कृष्ण कुंज संस्कृत विद्यालय, श्री भरत संस्कृत विद्यालय आदि का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के लिए राज्य सरकार जहां प्रदेश में तेरह संस्कृत ग्रामों की स्थापना करके गांव-गांव तक संस्कृत बोल चाल की भाषा हो, इस और कदम बढ़ाएं हैं। वहीं संस्कृत पढऩे वाली बालिकाओं को गार्गी छात्रवृत्ति देकर छात्राओं को भी संस्कृत पढऩे के लिए प्रेरित करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा विभाग संस्कृत विद्यालयों में साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, वेद आदि शास्त्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान, गणित, अंग्रेजी जैसे आधुनिक विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल कर संस्कृत के छात्रों को समाज में बराबरी का दर्जा देना का भी प्रयास किया जा रहा है। उत्तराखंड संस्कृत विवि हरिद्वार की ओर से जल्द ही संस्कृत के छात्रों को आईएएस, पीसीएस परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई जाएगी। विभाग उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के माध्यम से संस्कृत के छात्रों को विदेशी भाषाओं को सीखने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करेगा। मौके पर संस्कृत शिक्षा उप निदेशक डा. वाजश्रवा, श्रीभरत मंदिर संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त भट्ट, मुनीश्वर वेदांग के प्रधानाचार्य डॉ. जनार्दन प्रसाद कैरवान, कृष्ण कुंज संस्कृत विद्यालय की प्रधानाचार्या पूजा वशिष्ठ, मनोज द्विवेदी, जितेंद्र प्रसाद भट्ट, शंकर मणि भट्ट, डा.1 भानु प्रकाश उनियाल, शशि गौड़, सुरेश पंत, आचार्य हर्षमणि नौटियाल, प्रियव्रत रतूड़ी, सुमित चमोली आदि उपस्थित रहे।
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