कोटद्वार(आरएनएस)।चिल्लरखाल में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति प्रवेश द्वार का निर्माण हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक प्रवेश द्वार पर उनका नाम नहीं लिखा गया है। इसे लेकर क्षेत्रवासियों में रोष व्याप्त है। क्षेत्रवासी कार्यदायी संस्था के खिलाफ आंदोलन छेडऩे के लिए रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।
क्षेत्रवासी लंबे समय से चिल्लरखाल में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति द्वार के निर्माण की मांग उठाते आ रहे थे। स्थानीय स्तर पर जब मांग पर सुनवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासियों की ओर से इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा गया। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री कार्यालय ने मांग को स्वीकृति प्रदान करते हुए राज्य सरकार पत्र भेजा जिस पर राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में जिलाधिकारी पौड़ी, एसडीएम व नगर आयुक्त को पत्र भेजा गया। गर निगम ने स्मृति द्वार के निर्माण के लिए डीपीआर बनाने से मना कर दिया, जिस पर ग्रामीण निर्माण विभाग (आरडब्ल्यूडी) के माध्यम से डीपीआर तैयार की गई। स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2025 में कार्यदायी संस्था आरडब्ल्यूडी ने प्रवेश द्वार का निर्माण पूरा कर लिया, लेकिन प्रवेश द्वार के निर्माण के एक साल बाद भी कार्यदायी संस्था ने उस पर बाबा साहब का नाम अंकित नहीं किया, जिससे क्षेत्रवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। माजिक संस्था जनाधिकार मंच के अध्यक्ष आशाराम ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर प्रवेश द्वार पर बाबा साहब का नाम अंकित करने की मांग की है। साथ ही मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं होने पर 10 अप्रैल को ग्रामीण निर्माण विभाग के कार्यालय में धरने पर बैठने की चेतावनी दी है।
उधर, बसपा नेता एवं शैलशिल्पी विकास संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विकास कुमार आर्य ने कहा कि प्रवेश द्वार पिछले साल ही बनकर तैयार हो गया था, तब कार्यदायी संस्था ने जल्द प्रवेश द्वार पर बाबा साहब का नाम लिखवाने का भरोसा दिया था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके लिए आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
प्रवेश द्वार बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन अभी सौंदर्यीकरण का कार्य होना है। जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया की जा रही है। टेंडर होते ही सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू करवाया जाएगा। श्रीपति डोभाल, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण निर्माण विभाग कोटद्वार।
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