सीतापुर 5 अप्रैल (आरएनएस)। सकरन थाना क्षेत्र के सलोली मजरा मडोर गांव निवासी पैकरमा यादव पिछले चार वर्षों से वेतन न मिलने के कारण भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कस्बा सकरन स्थित भारत संचार निगम लिमिटेड के मोबाइल टॉवर पर वर्ष 2009 से गार्ड के रूप में तैनात पैकरमा को मात्र 3200 रुपये मासिक मानदेय मिलता था, जिससे वह किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करता था। पीडि़त के अनुसार, वेतन बंद होने से परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। वर्ष 2023 में उन्होंने लखनऊ स्थित श्रमायुक्त कार्यालय में याचिका दायर की, जिसके बाद 11 माह का 35,200 रुपये भुगतान मिला, लेकिन इसके बाद फिर भुगतान रोक दिया गया। पैकरमा का कहना है कि विभाग पर अब करीब 1 लाख 58 हजार रुपये बकाया है। कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उन्होंने राज्य कारागार मंत्री सुरेश राही को भी प्रार्थना पत्र सौंपा है। उधर बिसवां के एसडीओ अवनीश पाल का कहना है कि मानदेय का भुगतान जिला मुख्यालय से होता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक एक मेहनतकश गार्ड अपने हक के लिए यूं दर-दर भटकता रहेगा?
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