लखनऊ 7 अप्रैल (आरएनएस ),परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में परिवहन निगम से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई है।मंत्री ने बताया कि सार्वजनिक निजी सहभागिता पद्धति पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के 49 बस स्टेशनों को विकसित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इन बस स्टेशनों का विकास निर्माण, संचालन और हस्तांतरण पद्धति पर किया जाएगा।उन्होंने बताया कि बुलंदशहर जनपद के नरौरा, बलरामपुर जनपद की तुलसीपुर तहसील तथा हाथरस जनपद की सिकंद्राराऊ तहसील में बस स्टेशन निर्माण के लिए नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।परिवहन मंत्री ने बताया कि परिवहन निगम द्वारा सार्वजनिक निजी सहभागिता पद्धति पर बस स्टेशनों के विकास के द्वितीय चरण में इन 49 बस स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा। इन बस स्टेशनों पर यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे खरीदारी परिसर, चलचित्र गृह सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निवेशकों की तकनीकी क्षमता की शर्त को 150 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि पात्र परियोजनाओं में निवेशकों की अर्हता की समय सीमा 5 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि बनने वाले बस स्टेशनों पर निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रस्तावित स्थलों पर समान भू-निर्माण अनुपात 2.5 निर्धारित किया गया है तथा भूमि आवरण की नि:शुल्क अनुमति प्रदान की जाएगी। लीज अवधि समाप्त होने पर यदि विकासकर्ता स्वामित्व वापस नहीं करता है तो भूमि का स्वामित्व स्वत: ही परिवहन निगम को प्राप्त हो जाएगा।परिवहन मंत्री ने बताया कि बुलंदशहर में बस डिपो पूर्व में परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड की लीज भूमि पर संचालित किया जा रहा था, जिसकी लीज अवधि समाप्त हो गई है। ऐसे में नरौरा क्षेत्र में सिंचाई विभाग की 1.12 हेक्टेयर भूमि परिवहन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। देवीपाटन मंदिर के समीप यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बलरामपुर की तुलसीपुर तहसील में लोक निर्माण विभाग की 2 हेक्टेयर भूमि परिवहन विभाग को नि:शुल्क हस्तांतरित की जाएगी। वहीं हाथरस जनपद के सिकंद्राराऊ क्षेत्र के ग्राम रतनपुर और हुसैनपुर में 10.012 हेक्टेयर भूमि भी परिवहन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।उन्होंने बताया कि इन बस डिपो को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दुकानें और भोजनालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे यात्रियों को सुलभ, सस्ती और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से परिवहन निगम के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
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