मृत्यु के पूर्व ही दाखिल खारिज की प्रक्रिया वसीयतकर्ता ने करवाया
सुलतानपुर 8 अप्रैल (आरएनएस)। नगर कोतवाली क्षेत्र के नरायनपुर गांव में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है जिससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। शिव नन्दन ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनके पैतृक मकान को हड़पने के लिए उनके सगे चाचा एव चाची ने नगर पालिका कर्मियों से मिलीभगत कर कूटरचित वसीयतनामा तैयार कर लिया। शिकायत के अनुसार, मकान संख्या 168 पहले उनके बाबा छेदीराम के नाम था, जो बाद में उनकी पत्नी धनपत्ती देवी के नाम दर्ज हुआ। आरोप है कि चाचा भोलानाथ और चाची गीता देवी ने वर्ष 2008 में ही फर्जी वसीयत बनवा ली, जबकि धनपत्ती देवी उस समय जीवित थीं। हैरानी की बात यह है कि 2 अप्रैल 2013 को दाखिल-खारिज कर मकान गीता देवी के नाम दर्ज कर दिया गया, जबकि धनपत्ती देवी की मृत्यु 2 फरवरी 2014 को हुई।
कानूनी रूप से वसीयत व्यक्ति की मृत्यु के बाद ही प्रभावी होती है, ऐसे में पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में एक गवाह सहित नगर पालिका के लिपिक और अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है। कोतवाली नगर व पुलिस अधीक्षक में शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज न होने से शिकायतकर्ता ने दीवानी न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और सीजेएम सुल्तानपुर की अदालत में 173 /4 का वाद दायर किया जिसमे थाने की रिपोर्ट आ गई है अगली सुनवाई हेतु 8/4/2026 नियत थी जिसमे सीनियर अधिवक्ता दिनेश चंद्र गौड़ के बहस को सुनने के पश्चात आदेश के लिए सुरक्षित किया।
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