रांची 8 अप्रैल (आरएनएस)। घुटनों के दर्द से परेशान मरीजों के लिए अब बिना सर्जरी के राहत पाने का एक आधुनिक और प्रभावी विकल्प सामने आया है। रांची स्थित पारस एचईसी हॉस्पिटल में रेडियोफ्रीक्वेंसी एबलेशन (आरएफए) तकनीक के माध्यम से मरीजों को लंबे समय तक दर्द से राहत दी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार यह तकनीक खासकर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जो अभी टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) नहीं करवाना चाहते या सर्जरी को लेकर आशंकित हैं। आरएफए एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें दर्द पैदा करने वाले नसों के सिग्नल को ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे मरीज को 6 से 18 महीनों तक राहत मिल सकती है। हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. निर्मल ने बताया कि यह प्रक्रिया केवल घुटनों तक सीमित नहीं है, बल्कि पीठ, गर्दन, कंधे, कूल्हे और अन्य क्रॉनिक जॉइंट पेन में भी कारगर साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आरएफए एक डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती और बहुत कम समय में सामान्य गतिविधियों में वापसी संभव होती है।
डॉ निर्मल ने कहा कि बढ़ते उम्र और लाइफस्टाइल के कारण जोड़ों के दर्द की समस्या आम होती जा रही है। ऐसे में आरएफए जैसी आधुनिक तकनीक मरीजों को सर्जरी के विकल्प के रूप में एक सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रदान कर रही है। डॉ निर्मल ने मरीजों को सलाह दी है कि दर्द को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लें और अपनी स्थिति के अनुसार सही उपचार का चयन करें।
पारस एचईसी हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि हमारा उद्देश्य मरीजों को अत्याधुनिक और सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराना है। रेडियोफ्रीक्वेंसी एबलेशन (आरएफए) जैसी तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो सर्जरी से बचना चाहते हैं या जिन्हें सर्जरी कराना संभव नहीं है। यह न केवल दर्द में प्रभावी राहत देता है, बल्कि मरीजों को जल्दी सामान्य जीवन में लौटने में भी मदद करता है। उन्होंने कहा कि यह एक डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें मरीज को लंबे समय तक हॉस्पिटल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं होती और बहुत कम समय में सामान्य गतिविधियों में वापसी संभव होती है।
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