० शहादत की धरती पर अब विकास की नई शुरुआत
० नक्सल प्रभाव खत्म, बंदूक की जगह अब खेती और खुशहाली
० मिनपा में लौट रही खुशियां: अब गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोशनी
सुकमा, 08 अप्रैल (आरएनएस)। कभी नक्सलवाद का गढ़ और संघर्षों के लिए पहचाना जाने वाला सुकमा जिले का मिनपा गांव आज शांति और सुशासन की नई मिसाल पेश कर रहा है। मार्च 2020 की वह हृदयविदारक घटना, जिसमें 17 सुरक्षाकर्मियों ने अपनी शहादत दी थी, उस काले अध्याय को पीछे छोड़ते हुए मिनपा अब विकास की मुख्यधारा से जुड़कर ‘आत्मनिर्भरताÓ की ओर कदम बढ़ा चुका है।
स्वास्थ्य क्रांति-अब गांव में ही मिलता है उपचार
अतीत में ग्रामीणों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए ‘चिंतागुफाÓ या ‘दोरनापालÓ जैसे दूर-दराज के इलाकों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन आज गांव में ही उपस्वास्थ्य केंद्र स्थापित हो चुका है, जहाँ ग्रामीणों को नि:शुल्क दवाएं और त्वरित उपचार मिल रहा है। स्वास्थ्य केंद्र में बाइक एंबुलेंस की सुविधा दी जा रही है जो दूरस्थ पहुँचविहीन गांवों से मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र लाने का कार्य करती है।
डिजिटल सेवा: गांव में खुला आधार केंद्र
प्रशासन की सक्रियता से अब ग्रामीणों को शासकीय दस्तावेजों के लिए शहर की दौड़ नहीं लगानी पड़ती। गांव में ही आधार कार्ड अपडेट, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसी ऑनलाइन सुविधाएं सुलभ करा दी गई हैं।
शिक्षा और पोषण का उजियारा
मिनपा में अब स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र पूरी जीवंतता के साथ संचालित हैं। बच्चों के हाथों में अब किताब और कलम है, जो एक सुरक्षित और शिक्षित भविष्य की नींव रख रहे हैं।
सुदृढ़ राशन व्यवस्था और बिजली की पहुंच
गांव में निर्मित नए पीडीएस भवन से हर माह नियमित राशन वितरण सुनिश्चित हो रहा है। वहीं, बिजली के खंभों ने गांव के अंधेरे को दूर कर दिया है। घर-घर बिजली पहुंचाने का कार्य अब अंतिम चरण में है, जिससे गांव की रातें भी अब रोशन हैं।
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मिनपा गांव में विकास की यह नई बयार ग्रामीणों के जिला प्रशासन के प्रति बढ़ते विश्वास का परिणाम है। हमारा मुख्य उद्देश्य नक्सलवाद के खात्मे के साथ दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। आज मिनपा में स्कूल, बिजली, राशन और स्वास्थ्य सुविधाओं का सुलभ होना इस बात का प्रमाण है कि विकास अब अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है। हम मिनपा की तरह जिले के हर अंदरूनी गांव को मुख्यधारा से जोडऩे और वहां के युवाओं को बेहतर भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मिनपा निवासी माड़वी सुक्का पिता भीमा को शासन द्वारा 2 हेक्टेयर रकबे का वनाधिकार पत्र प्रदान किया गया है, जिससे उन्हें अपने कब्जे की वन भूमि पर मालिकाना हक मिला। वनाधिकार पट्टे की भूमि पर माड़वी सुक्का ने धान की खेती कर आय बढ़ाई और छत्तीसगढ़ शासन की समर्थन मूल्य धान खरीदी योजना के तहत धान बेचकर प्राप्त राशि से ट्रैक्टर की किश्त चुकाई। साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का मकान निर्माण की स्वीकृति मिली है और उनका आवास निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड, जॉब कार्ड, आयुष्मान कार्ड और पैन कार्ड भी बन चुके हैं, जिससे उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है।
प्रशासनिक संकल्प से बदली तस्वीर
नक्सलवाद के कारण थमा हुआ विकास अब ‘वनाधिकार पट्टाÓ, समर्थन मूल्य में धान खरीदीÓ और ‘पीएम आवासÓ जैसी योजनाओं के माध्यम से धरातल पर दिखाई दे रहा है। शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने ग्रामीणों के मन से भय को समाप्त कर विश्वास का संचार किया है। शासन का लक्ष्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। ?मिनपा गांव आज केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ते बस्तर के बदलते स्वरूप की पहचान बन गया है।
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