नई दिल्ली,09 अपै्रल (आरएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खडग़े 10 अप्रैल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इसमें सीनियर नेताओं के साथ महिला आरक्षण बिल पर पार्टी के विचार पर चर्चा की जाएगी और उन्हें पक्का किया जाएगा.
यह बैठक महिला आरक्षण बिल में कुछ बदलावों को पास करने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद के विशेष सत्र से पहले हो रही है. इसमें महिला आरक्षण बिल में अहम बदलाव पास किए जाएंगे. बिल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत कोटा देता है.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 106वां संशोधन एक्ट) के नाम से जाना जाने वाला महिला रिजर्वेशन बिल 2023 में पास हुआ था और इसे 2029 तक लागू किया जाना था. इसके बाद जनगणना और लोकसभा सीटों का डिलिमिटेशन होना था. विशेष सत्र की घोषणा केंद्र ने 2 अप्रैल को खत्म हुए बजट सत्र के आखिर में की थी.
कांग्रेस के अंदर के लोग विशेष सत्र की टाइमिंग को लेकर परेशान हैं और उन्होंने कहा कि केंद्र तमिलनाडु (23 अप्रैल) और पश्चिम बंगाल (23 और 29 अप्रैल) में होने वाले अहम विधानसभा चुनावों से कुछ दिन पहले ज़रूरी कानून में बदलाव करके राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, केंद्र ने महिला आरक्षण बिल पर अपना एजेंडा पब्लिक कर दिया था, लेकिन सरकार लोकसभा सीटों के डिलिमिटेशन के मुद्दे पर चुप रही, जिससे सीटों की गिनती 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी.
कांग्रेस को लगा कि दोनों मुद्दे जुड़े हुए हैं और उसे चिंता थी कि केंद्र विशेष सत्र के दौरान चुपके से संसदीय सीटों के डिलिमिटेशन का मुद्दा ला सकता है ताकि इस कदम से पहले होने वाली लंबी बातचीत से बचा जा सके. कांग्रेस का मानना है कि अलग-अलग लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के कोटे की अवधारणा कांग्रेस का ओरिजिनल आइडिया है और वह नहीं चाहती कि बीजेपी इसका श्रेय ले.
सीडब्ल्यूसी में परमानेंट इनवाइटी रजनी पाटिल ने बताया, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सबसे पहले 64वां और 65वां संविधान संशोधन लाकर देश में महिलाओं को सशक्त बनाया था. ये संशोधन 1989 में सिर्फ राज्यसभा में पास हुए थे, ताकि पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें रिजर्व की जा सकें. बाद में, 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए राज्यसभा और लोकसभा दोनों ने कोटा पास किया, जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे.
रजनी पाटिल ने कहा, हमने 2010 में भी राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पास किया था, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, लेकिन उस समय विपक्ष के कारण यह लोकसभा में पास नहीं हो सका था. देश में महिलाओं को सशक्त बनाना कांग्रेस का मूल विचार है. एनडीए सरकार 2023 में ही महिला आरक्षण बिल में बदलाव कर सकती थी, लेकिन केंद्र तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले राजनीतिक फ़ायदा उठाने के लिए अब यह कानून लाया है.
कांग्रेस वर्किंग कमेटी लोकसभा सीटों के डिलिमिटेशन के मुद्दे पर भी चर्चा करेगी, जो महिलाओं के कोटे के मुद्दे से काफी जुड़ा हुआ है. रजनी पाटिल ने कहा, उन्होंने लोकसभा सीटों के डिलिमिटेशन के बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन इसे अचानक ला सकते हैं. हमने इस मुद्दे पर सरकार से सफाई मांगी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. लोकसभा और विधानसभा सीटों के डिलिमिटेशन पर सफाई के बिना महिलाओं का कोटा कैसे लागू किया जाएगा.
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि ट्रेजरी बेंच से संकेत मिले हैं कि मौजूदा लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा सकती है, लेकिन यह कदम दक्षिणी, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के हितों के खिलाफ जा सकता है. हालांकि, इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. सीडब्ल्यूसी सदस्य कमलेश्वर पटेल ने कहा कि डिलिमिटेशन का मुद्दा एक मुश्किल मामला है और इसे अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के साथ सही सलाह-मशविरा के बाद ही लागू किया जाना चाहिए.
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