लखनऊ, 10 अप्रैल (आरएनएस )आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश के अयोध्या प्रांत अध्यक्ष विनय पटेल ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर योगी सरकार और बिजली कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ भारी जनआक्रोश देखने को मिल रहा है और यह योजना जनता की सुविधा के बजाय आर्थिक शोषण का माध्यम बनती जा रही है। उन्होंने स्मार्ट मीटरों को लूट मीटर करार देते हुए कहा कि इससे उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है और बिजली व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो गई है।
विनय पटेल ने कहा कि वर्ष 2018 में लगाए गए 2जी स्मार्ट मीटरों का भी जनता ने विरोध किया था, क्योंकि उन मीटरों से 15 से 20 प्रतिशत तक अधिक बिल आने की शिकायतें सामने आई थीं। उस समय सरकार ने दावा किया था कि ये मीटर लगभग आठ वर्षों तक सुचारु रूप से कार्य करेंगे, लेकिन अब उन्हें हटाकर 4जी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में प्रदेश में लगभग 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 70 लाख प्रीपेड मीटर हैं, और इन्हीं प्रीपेड मीटरों में सबसे अधिक गड़बडिय़ां सामने आ रही हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिना सहमति के लगाए जा रहे हैं, जो विद्युत अधिनियम की धारा 55 का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि प्रीपेड प्रणाली में सबसे बड़ी समस्या यह है कि जैसे ही रिचार्ज समाप्त होता है, तुरंत बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है और रिचार्ज कराने के बाद भी 12 से 36 घंटे तक बिजली बहाल नहीं हो पाती। इस कारण आम जनता को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उनके दैनिक जीवन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।विनय पटेल ने बताया कि प्रदेश के गाजियाबाद, नोएडा, बहराइच, अंबेडकर नगर और सुल्तानपुर सहित कई जनपदों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि स्मार्ट मीटर तेज गति से चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां पहले 200 से 300 रुपये तक का बिजली बिल आता था, वहीं अब वही बिल 2500 से 2600 रुपये तक पहुंच रहा है, जबकि कई मामलों में 20 हजार रुपये तक के बिल भेजे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने इसे उपभोक्ताओं के साथ सीधा धोखा और आर्थिक शोषण बताया।प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने स्मार्ट मीटर परियोजना में 959 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन मीटरों की लागत लगभग 2800 रुपये होनी चाहिए थी, उन्हें 6016 रुपये तक की लागत में लगाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी कंपनियों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि को उनके बिजली बिलों में समायोजित कर वापस किए जाने की भी मांग की।विनय पटेल ने प्रदेश सरकार पर झूठे दावे करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जबकि वास्तविकता यह है कि अलग-अलग समय पर अलग-अलग दरों से बिजली शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह अव्यवहारिक है, जिससे किसान, मजदूर और सामान्य उपभोक्ता सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां बिजली विभाग के कर्मचारी प्रतिदिन लोगों के कनेक्शन काट रहे हैं। उनके अनुसार प्रदेश में लगभग 8 लाख घरों के बिजली कनेक्शन काटे जा चुके हैं और उन्हें पुन: जोडऩे के लिए लोगों से 2000 से 4000 रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने अंबेडकर नगर का उदाहरण देते हुए बताया कि एक गरीब व्यक्ति के घर का बिजली बिल 70 हजार रुपये तक पहुंच गया, जो पूरी व्यवस्था की गंभीर खामियों को दर्शाता है।विनय पटेल ने यह भी बताया कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार बिजली विभाग में लगभग 16 हजार पद रिक्त पड़े हैं, जिसके कारण बिजली आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि इन रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए, ताकि व्यवस्था में सुधार लाया जा सके और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकें।प्रेस वार्ता के अंत में विनय पटेल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की मांग है कि बिना सहमति लगाए गए स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाया जाए, प्रीपेड प्रणाली की खामियों को दूर किया जाए, बिजली कटौती और देरी से बहाली की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए तथा पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आम आदमी पार्टी प्रदेशभर में व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगी और जनता के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।
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